नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बेटी के साथ यौन शोषण, बलात्कार और उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार पिता राजीव बब्बर की जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने निचली अदालत के 15 जून 2021 के आदेश को अनुचित बताते हुए इसे खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने फैसले में कहा कि निचली अदालत ने अपराध की गंभीरता को पूरी तरह नजरअंदाज किया और अप्रासंगिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। आरोपी को सात दिनों के अंदर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है। मामला वर्ष 2021 का है, जब पीड़िता (जो अब 20 वर्ष की हो चुकी है) ने अपनी मां रूपी बब्बर के माध्यम से अदालत में याचिका दायर की थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके जैविक पिता राजीव बब्बर ने लगभग 4-5 वर्षों (2016 से 2020 तक) तक उसका यौन शोषण किया, जिसमें अनुचित स्पर्श, पोर्नोग्राफिक सामग्री दिखाना और बलात्कार जैसे कृत्य शामिल थे। वह तब 10 से 15 वर्ष की उम्र की थी और घर में डर का माहौल होने के कारण वह चुप रही। ब्यूरो