(फॉलोअप)- आठ पूर्व सैनिकों द्वारा करोड़पति बनने का झांसा देकर ठगी का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोेएडा। निवेश कर जल्द अमीर बनने का सपना दिखाकर ठगी करने वाले आरोपियों के पास से मिले तीन बैंक खातों में जमा रकम की जांच के लिए ईकोटक-1 कोतवाली पुलिस ने संबंधित बैंक से डिटेल मांगी है। आरोपियों की सीडीआर भी खंगाली जा रही है। वहीं आरोपियों के जेल जाने की सूचना के बाद दुबई में बैठे सरगना सोमनाथ ने आरोपियों को व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर कर दिया है।
गौरतलब है कि पुलिस ने ठगी करने वाले गिरोह का सोमवार को पर्दाफाश कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने जल्द अमीर बनने के लिए सेना की नौकरी छोड़कर ठगी का धंधा शुरू कर दिया था। दुबई से संचालित गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। आरोपी क्यूनेट/विहान नाम की फर्जी मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी के जरिये निवेश कराने के नाम पर लोगों को जल्द अमीर बनने का झांसा देते थे और फिर उनसे ठगी करते थे। लोगों से कंपनी के उत्पाद जैसे सोना, हीरा और घड़ियां खरीदने और बेचने के नाम पर निवेश कराया जाता था। आरोपी सेना के जवानों से संपर्क करते और उन्हें निवेश के लिए फंसाते थे।
दुबई से भेजा जाता था लिंक
आरोपियों ने पुलिस विभाग से जुड़े कुछ लोगों को भी झांसे में लिया था। आरोपी जिस फर्जी कंपनी से जोड़ते थे। वह ई-कॉमर्स और नेटवर्क मार्केटिंग की तरह काम करती है। इसमें कंपनी के उत्पादों को बेचने और एक टीम बनाने के लिए वितरकों को कमीशन दिया जाता था। आरोपी सदस्य बनाते थे, लेकिन उन्हें न तो कमीशन देते और न ही सामान भेजते थे। अगर किसी को सामान भेज भी दिया तो वह नकली होता था। आरोपी झांसे में लेने के लिए दुबई के सरगना से ऑनलाइन बात कराते थे। निवेश करने वालों को डायरी देकर कहते थे कि इसमें हजारों बार लिखो कि मुझे करोड़पति बनना है और एक दिन मेरी मनोकामना पूरी होगी। ठगी की रकम दुबई भेजी जा रही थी। दुबई से ही एक लिंक भेजा जाता था, जिस पर सदस्य को जोड़ा जाता और इसी के माध्यम से रकम का लेनदेन होता था।
पता न चल पाए ग्रुप में कितने लोग, इसलिए किया बाहर
कोतवाली प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल की सीडीआर निकलवाई गई है। जिससे यह पता चल सके कि आरोपी किससे बात कर संपर्क में रहते थे। आरोपी जिस वाट्सएप ग्रुप से जुड़े थे उसके एडमिन ने आरोपियों को ग्रुप से बाहर कर दिया है। जिससे आशंका यह जाहिर की जा रही कि वाट्सएप में और कौन-कौन लोग जुड़े यह पता ना चल पाए। इस कारण ही दुबई में बैठे सरगना ने पकड़े गए आरोपियों को ग्रुप से बाहर का रास्ता दिखाया है।