-विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता कीं दो शिकायतें आयोग में हैं दर्ज
-नियम दरकिनार कर 20 करोड़ की बर्बादी का लगाया है आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास में कथित अनियमितताओं और जनता के पैसे की बर्बादी मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग(सीवीसी) ने जांच शुरू कर दी है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने गैरकानूनी निर्माण, पर्यावरण नियमों की अनदेखी और करदाताओं के धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। बाथरूम और पर्दों पर भारी-भरकम खर्च से करीब 20 करोड़ रुपये की बर्बादी का भी खुलासा किया है।
दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष और तत्कालीन विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने सिविल लाइन्स 6 फ्लैग स्टाफ रोड पर पूर्व मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में हुई गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय सतर्कता आयोग में दो शिकायतें दर्ज की हैं। पहली शिकायत 14 अक्टूबर 2024 को दर्ज की गई थी, जिसमें विजेंद्र गुप्ता ने बताया है कि राजपुर रोड पर आठ सरकारी फ्लैटों को बिना अनुमति तोड़ा गया और फ्लैग स्टाफ रोड पर दो बंगलों 8 ए और 8 बी को जोड़कर बिना कानूनी मंजूरी के 8 एकड़ में बड़ा परिसर बनाया गया। इसकी निविदाएं संशोधन और बदलाव के नाम पर निकाली गईं, लेकिन हकीकत में नया भवन बनाया गया, जो भवन नियमों का खुला उल्लंघन है।
पर्यावरण की अनदेखी का भी जिक्र
इसके अलावा शिकायत में पर्यावरण नियमों की अनदेखी का जिक्र है। कई पेड़ बिना अनुमति काटे गए और 19,700 पेड़ों के बदले पौधरोपण नहीं किया गया। जमीन के उपयोग और निर्माण क्षेत्र की सीमा का भी दुरुपयोग किया गया, जिससे पर्यावरण और भवन नियमों का गंभीर उल्लंघन हुआ। इसमें विजेंद्र गुप्ता ने आयोग से जल्द और गहन जांच की मांग की थी। इस पर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के मुख्य सतर्कता अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी है, जो अब आयोग के पास विचाराधीन है।
जनता के पैसे की बर्बादी का मुद्दा उठाया
इस मामले में दूसरी शिकायत 21 अक्टूबर 2024 को हुई है, जिसमें विजेंद्र गुप्ता ने आवास के नवीकरण में जनता के पैसे की बर्बादी का मुद्दा उठाया। इसमें बताया गया कि बाथरूम की सैनिटरी फिटिंग्स पर 15 करोड़ रुपये और खिड़कियों के पर्दों पर 4-5.6 करोड़ रुपये खर्च किए गए। विजेंद्र गुप्ता ने इसे करदाताओं के धन का दुरुपयोग और जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर विलासिता को तरजीह देने का मामला बताया है।