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Noida News: दुर्गा पंडालों में सांस्कृतिक व धार्मिक अनुष्ठानों की धूम

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कन्नौज। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार को मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की पूजा अर्चना की गई। सुबह से ही देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की कतार लग जाती है। उधर, दुर्गा पंडालाें में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक आयोजनों की धूम रही। वहीं घरों में भी दरबार सजाकर मां भवानी की आराधना की जा रही है।
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नगर के एसवीएस खेल मैदान में सन्मार्ग समिति द्वारा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। यहां पर मेदांता हास्पिटल लखनऊ की टीम ने 64 मरीजों की जांच कर इलाज किया। वहीं सोमवार देर रात छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर जलवा बिखेरा और वाहवाही लूटी। मोहल्ला नखासा स्थित मां फूलमती देवी मंदिर में भक्तों की लंबी कतार लग रही है।
इसी प्रकार चौधरी सराय स्थित मनकामेश्वर मंदिर, हरदेवगंज के पंडाल में आचार्य राजीव मिश्र, परीक्षित राजेशचंद्र सैनी ने पत्नी संतोष सैनी के साथ मातारानी की आरती उतारी। मकरंदनगर स्थित दुर्गा उत्सव पंडाल में बुधवार से कथा व्यास राजू बम बम चतुर्वेदी द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे। समिति के सदस्य पुनीत पांडेय, अविनाश शुक्ला ने बताया कि 30 सितंबर तक प्रतिदिन दोपहर ढाई से शाम साढ़े बजे तक कथा का आयोजन किया जाएगा।
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फोटो :49: बांके बिहारी मंदिर में माता रानी की आरती करते श्रद्धालु। संवाद
मंदिरों में गूंजे मां ब्रह्मचारिणी के जयकारे

छिबरामऊ। नवरात्र के दूसरे दिन मंगलवार को देवी मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। घंटियों की घनघनाहट व जय माता दी के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजते रहे।

सौरिख रोड स्थित प्राचीन मां कालिका देवी मंदिर में, मोहल्ला दीक्षितान स्थित बांके बिहारी मंदिर, मोहल्ला गनेश चौधरी स्थित शक्तिपीठ गमा देवी मंदिर व बहबलपुर स्थित मां संतोषी माता के मंदिर में सुबह से ही महिलाओं व पुरुषों की भीड़ लगी रही। यह सिलसिला देर रात तक चला। मां दुर्गा की नौ शक्तियों का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। शक्ति पीठ गमा देवी मंदिर के पुजारी पंडित बनारसी दास शास्त्री ने बताया कि ब्रह्मचारिणी में ब्रह्मा शब्द का अर्थ तपस्या से है। ब्रह्मचारिणी अर्थात् तप का आचरण करने वाली। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इनके दाएं हाथ में जप की माला व बाएं हाथ में कमंडल रहता है। मां दुर्गा का यह दूसरा स्वरूप भक्तों को अनंत फल देने वाला है। इसकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।
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