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46 हजार बच्चों के सुरक्षा कवच पर संकट

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नोएडा (नेहा शर्मा)। कोरोना संक्रमण के बीच में जिले में 46 हजार बच्चों का टीकाकरण अटकने से उनका सुरक्षा कवच कमजोर होता दिख रहा है। जिले में जीरो से 1 साल के शिशुओं की संख्या करीब 46000 और 5 वर्ष तक के तीन लाख से अधिक हैं, जिन्हेें बीसीजी, रोटावायरस, खसरा, डीपीटी, समेत कई टीके नहीं लग पा रहे हैं। इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उन क्षेत्रों में टीकाकरण किया जा रहा है, जहां संक्रमण के मामले नहीं हैं। विभाग के पास स्टाफ की कमी है। एएनएम की ड्यूटी वैक्सीनेशन कार्यक्रम में लगी है। ऐसे में शासन से डॉक्टर समेत पैरामेडिकल स्टाफ की मांग की है।
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प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत एएनएम की ड्यूटी टीकाकरण के लिए होती है। वे जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर बच्चों को टीका लगाती थी। सप्ताह में दो दिन बुधवार और शनिवार को टीका लगाया जाता था। अन्य दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर कैंप लगाए जाते थे। इसके तहत नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अलावा रबुपुरा, दादरी, दनकौर, जेवर के कई गांव में जाकर टीकाकरण किया जाता था। आशा वर्कर गांव में एक दिन पहले बता देती थी कि कल टीकाकरण होगा, ऐसे में ज्यादा से ज्यादा लोग बच्चों का टीकाकरण करा लेते थे।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि जीरो से 1 साल के करीब 46000 बच्चों का टीकाकरण किया जाना है। वहीं, 5 साल के करीब 3 लाख बच्चे होंगे, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण अस्पताल, स्वास्थ्य केंद्रों में टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। यहां बच्चों को बुलाना सुरक्षित नहीं है। हालांकि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण हो रहा है। शहरी क्षेत्रों में एक बार में 60 से 70 लोगों की भीड़ आ जाती है, जो विभाग के लिए चुनौती है।
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टीकाकरण बच्चों का सुरक्षा कवच
बच्चों का टीकाकरण और कोविड इंफेक्शन के खिलाफ सुरक्षा कवच स्थापित करना हर माता-पिता के लिए समझदारी भरा फैसला है। जन्म के समय दिए गए कैलेंडर में निर्धारित सभी खुराक बच्चों को देना महत्वपूर्ण है। ऐसा नहीं होने से बच्चे बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं, जो टीकाकरण से रोकी जा सकती है। इसलिए मदरहुड हॉस्पिटल नोएडा के बच्चों के लिए घर पर टीका लगाने की सुविधा दे रहा है। - नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. निशांत बंसल, मदरहुड हॉस्पिटल
बच्चों के लिए भले अभी कोरोना टीका उपलब्ध ना हो, लेकिन अन्य बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण समय पर होना जरूरी है। - डॉ. रेनू अग्रवाल, सीएमएस
एएनएम वैक्सीनेशन में और आशा वर्कर जागरूकता कार्यक्रम में व्यस्त
फिलहाल कोरोना वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। एएनएम की ड्यूटी टीकाकरण में लगी है, वहीं आशा वर्कर कोरोना के प्रति जागरूक कर रहीं हैं। कहीं कोई पॉजिटिव मरीज मिलता है तो उसको किट उपलब्ध करा रही हैं। एक आशा वर्कर ने बताया उनको सितंबर 2020 के बाद से मानदेय भी नहीं मिला है। सिर्फ जननी सुरक्षा कार्यक्रम के तहत ही पैसा दिया गया है।
सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में लगने वाले टीके
- जन्म के तुरंत बाद (24 घंटे के भीतर) - हेपिटाइटिस बी
- जन्म के तुरंत बाद (15 दिन के भीतर) - पोलियो
- जन्म के तुरंत बाद (एक वर्ष की उम्र तक) - बीसीजी
- 6 सप्ताह पर (डेढ़ माह पर) - पोलियो, रोटावायरस, एआईपीवी, पीसीवी, पेन्टावेलेन्ट
- 10 सप्ताह पर (पहली खुराक के 4 सप्ताह के अंतराल पर) -पोलियो, रोटा वायरस, पेन्टावेलेन्ट
- 14 सप्ताह पर (पहली खुरा के 4 सप्ताह के अंतराल पर) - पोलियो, रोटा वायरस, एफआईपीवी, पीसीवी, पेन्टावेलेंट
- 9 माह पर - विटामिन ए, खसरा, पीसीवी
- 16 से 24 माह पर - विटामिन ए, पोलियो, खसरा, डीपीटी
- 5 से 6 वर्ष पर - डीपीटी
नौनिहालों पर भारी न पड़ जाए तीसरी लहर
नोएडा (प्रगति मिश्रा)। जिला स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की कमी के कारण तीसरी लहर में बच्चों की समुचित चिकित्सा कैसे हो पाएगी, इस पर सवाल उठने लगे हैं। उधर, हकीकत से परे स्वास्थ्य विभाग अपनी उपलब्धियां गिनाने से नहीं चूक रहा। हालत यह है कि चाइल्ड पीजीआई जैसे अस्पतालों में कोविड संक्रमित गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं।
चाइल्ड पीजीआई के डॉयरेक्टर डॉ. डीके गुप्ता के अनुसार उनके अस्पताल में कोविड संक्रमित तीन बच्चों की मौत हुई, जो गंभीर बीमारियों से भी ग्रसित थे। वहीं, अस्पताल स्टाफ दबी जुबान में यह संख्या 8 से अधिक होने की बात कर रहा है। कुछ अन्य अस्पतालों में भी कोविड संक्रमण के बाद बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं। डॉ. गुप्ता बताते हैं कि दूसरी लहर में 180 मामले सामने आए थे, जिनमें 48 बच्चे थे। इनमें से 19 गंभीर बीमारियों से ग्रस्त थे। उपचार के दौरान 3 बच्चों की मौत हो गई। कोरोना की दोनों लहर में कितने बच्चों ने जान गंवाई, इसका विभागीय अधिकारी कोई सटीक डाटा उपलब्ध न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। । डॉ. गुप्ता के अनुसार कोविड संग दूसरी बीमारी से पीड़ित बच्चों के लिए खास विशेषज्ञों की जरूरत रहती है। वेंटिलेटर सहित अन्य उपकरणों की संख्या बढ़ा भी दी जाए तो हर स्वास्थ्यकर्मी उन्हें नहीं चला सकता है।
बिना डॉक्टर कैसे होगा इलाज
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों में चाइल्ड वार्ड बनाने के दावे कर रहा है। विभाग की माने तो योजना पर काम शुरू है, लेकिन बच्चों के डॉक्टरंों की कमी है। चाइल्ड पीजीआई में ही स्टाफ की कमी व खाली पदों पर भर्ती का मुद्दा लंबे समय से उठ रहा है। जिला अस्पताल में एक शिशु रोग विशेषज्ञ है। लेकिन अन्य अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
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हमने गंभीर बीमारियों से ग्रसित 16 बच्चों की जिंदगी बचाई है। अस्पताल अपने स्तर पर बच्चों के बेहतर इलाज के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। - डॉ. डीके गुप्ता डॉयरेक्टर चाइल्ड पीजीआई
शासन के आदेशानुसार बच्चों के वार्ड बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। वार्ड संचालन के लिए चिकित्सकों को नियुक्त करने संबंधी मांग की जाएगी। - डॉ. दीपक ओहरी सीएमओ
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