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राख से ईंट बनाने वाले 70 से ज्यादा उद्योगों पर संकट

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नोएडा। कोरोगेटेड बॉक्स बनाने उद्योगों के बाद अब फ्लाई एश से ईंट और ब्लॉक बनाने वाले उद्योगों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इन उद्योगों को थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली 20 प्रतिशत फ्लाई एश निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। इस पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय रोक लगाने की तैयारी कर रहा है।
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इस कारोबार से जुड़े उद्यमियों से दो महीने में सुझाव मांगे गए हैं। जिले के उद्यमियों ने भी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि फ्लाई एश की आपूर्ति बंद हुई तो इससे अकेले गौतमबुद्ध नगर के ही 70 से ज्यादा उद्योग बंद हो जाएंगे और 10 हजार से ज्यादा श्रमिक बेरोजगार हो जाएंगे।
सालाना करीब 100 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाले इस उद्योग से सरकार को भी जीएसटी के रूप में अच्छा खासा राजस्व मिलता है। मसलन, फ्लाई एश से बनी ईंटों और ब्लॉक की बिक्री पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाई जाती है। फ्लाई एश ब्रिक्स मैन्यूफैक्चरर एसोसिएशन गौतमबुद्ध नगर के उद्यमी एलबी सिंह बताते हैं कि गौतमबुद्ध नगर ही नहीं बल्कि देशभर में करीब 1.5 लाख उद्योग बंद हो जाएंगे और लाखों श्रमिकों के सामने परेशानी खड़ी हो जाएगी।
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अकेले गौतमबुद्ध नगर में ही हर महीने एक लाख टन फ्लाई एश की खपत होती है। छोटे उद्योग सबसे ज्यादा हैं, जबकि कई बिल्डर भी कारोबार से जुड़े हैं। नोएडा, ग्रेनो, ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन सहित तमाम बिल्डरों की बड़ी परियोजनाओं में जिले में बनी ब्लॉक का प्रयोग किया गया है। एनटीपीसी दादरी से सबसे ज्यादा राख की आपूर्ति स्थानीय उद्योगों को होती है। हालांकि, राष्ट्रीय राजमार्ग और सीमेंट बनाने वाले उद्योगों को फ्लाई एश खरीदनी होती है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया था कदम
उद्यमी एलबी सिंह का कहना है कि लाल ईंट बनाने के लिए मिट्टी का बहुत ज्यादा प्रयोग होता है। पर्यावरण और उपजाऊ भूमि संरक्षण के लिए पर्यावरण मंत्रालय ने ही थर्मल पावर प्लांटों को 20 फीसदी फ्लाई एश उपलब्ध कराने का प्रावधान किया था।
फ्लाई एश से बनी ईंट, इंटरलॉकिंग टाइल्स, ब्लॉक का प्रयोग सरकारी विकास कार्यों में भी होता है। इससे ग्रीन बिल्डिंग फॉर्मूले को बढ़ावा मिल रहा है। जिन बिल्डिंगों में फ्लाई एश से बनीं ईंटो या ब्लॉक का प्रयोग होता हैए उनमें गर्मी कम होती है और बिजली की खपत भी कम होती है। फ्लाई एश से बनी ईंटों का प्रयोग जिन बिल्डर परियोजनाओं में होता है, उनको एफएआर में 5 फ ीसदी ज्यादा एफएआर का लाभ भी दिया जाता है।
लोकसभा में उठाया जा चुका मुद्दा
अभी थर्मल पावर प्लांटों से आपूर्ति बंद नहीं हुई है। इसको लेकर आपत्तियां मांगी गई हैं। इस संबंध में कारोबारियों ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी मुलाकात की थी। लोकसभा में भी एक सांसद इस मुद्दे को उठा चुके हैं।
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