ग्राम बोड़ाकी के बलराज भाटी की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चमरावली रामगढ़ क्षेत्र की चकबंदी में हुई हेराफेरी के मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, उपसंचालक चकबंदी समेत 10 लोगों के खिलाफ परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही उनको बयान के लिए 8 जून को कोर्ट में तलब किया है।
ग्राम बोड़ाकी के बलराज भाटी ने कोर्ट में धारा 156/3 के तहत शिकायत की थी कि ग्राम चमरावली रामगढ़ में चकबंदी की प्रक्रिया फर्जी तरीके से पूर्ण कर लागू कराई गई थीं।
ग्राम के कुछ किसानों ने चकबंदी प्रक्रिया से असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश पारित कर दिया था। स्थगन आदेश के बाद ग्राम में मौके पर चक सीमांकन, कब्जा परिवर्तन व अन्य चकबंदी की कार्रवाई नहीं की गई थी।
2006 में ग्राम चमरावली रामगढ़ व अन्य ग्राम की 2500 एकड़ जमीन को हाईटेक टाउनशिप को विकसित करने का लाइसेंस बिल्डर को दिया गया। मामले में हाईकोर्ट ने गांव की चकबंदी को निरस्त कर दिया गया था।
2 अक्तूबर 2015 को वर्तमान जिलाधिकारी को दोषी चकबंदी के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिया था। लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
मामले में कोर्ट में दिए पत्रावलियों के मद्देनजर रखते हुए उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 30 मार्च को चकबंदी आयुक्त द्वारा समस्त अपनाई गई प्रक्रिया को निरस्त किए जाने को ध्यान में रखते हुए गौतमबुद्ध नगर न्यायालय ने 156/3 के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करके हुए परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। परिवादी को बयान के लिए 8 जून 2016 को न्यायालय में तलब किया है।