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जेएनयू में लगता डर, सुरक्षा मिलने पर ही जाएंगे: सुशील कुमार

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कैंपस में जाने से लगता है डर, सुरक्षा मिलने पर ही जाएंगे: सुशील
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- एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने हिंसा को विवि प्रबंधन की नाकामी करार दिया
- लेफ्ट ने हॉस्टल में दिव्यांग व छात्राओं पर आधी रात हमले का आरोप
- एम्स से घायल दिव्यांग छात्र सुशील स्ट्रेचर पर पहुंचे प्रेस कांफ्रेंस

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में अब जाने से डर लगता है। वामपंथी छात्रों ने एबीवीपी को वोट देने के चलते रविवार देर आधी रात हॉस्टल को कमरे में घुसकर पीटा। लेकिन जेएनयू सुरक्षा कर्मी मूकदर्शक बने रहे। यह विश्वविद्यालय प्रबंधन की नाकामी है कि कैंपस में तीन दिन तक पूर्व वामपंथी छात्र हिंसा करते रहे पर कार्रवाई नहीं हुई। यह बात जेएनयू एबीवीपी से जुड़े सात जख्मी छात्रों ने यह बात कहीं। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि एम्स से छुट्टी मिलने के बाद स्ट्रेचर पर पहुंचे दिव्यांग छात्र सुशील ने कैंपस में सुरक्षा देने की गुहार लगाकर विवि प्रबंधन को कटघरे में खड़ा कर दिया।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में मंगलवार को राष्ट्रीय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने जेएनयू हिंसा पर अपनी बात रखी। जेएनयू एबीवीपी पदाधिकारी व जेएनयू में पीएचडी छात्रा निधि त्रिपाठी ने बताया कि रविवार रात दो से सोमवार सुबह आठ से नौ बजे तक हॉस्टल में एबीवीपी से जुड़े छात्रों को तलाश करते हुए मारपीट की गई। दिव्यांग व छात्राओं पर भी हमला हुआ है। फेसबुक के माध्यम से वामपंथी छात्रों ने डीयू, जामिया व हैदराबाद यूनिवर्सिटी तक छात्रों को बुलाया है। पेरियार, झेलम व माही हॉस्टल में ज्यादा बेरहमी दिखाई गई। करीब 25 से अधिक छात्रों को चोटें आईं हैं। राजेश्वर कांत, आशुतोष मिश्रा, चंद्रवीर, ओमकार श्रीवास्तव समेत अन्य घायल छात्रों ने सुरक्षा की गुहार लगाई।
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-मार तो सकते हो पर आवाज नहीं दबा सकते
मतगणना के दौरान ही आशुतोष को मारने की कोशिश की गयी। बीच-बचाव करने पर एक वामपंथी छात्र ने हाथ मोड़ दिया, जिससे हाथ में फ्रैक्चर हो गया। रविवार आधी रात मेरे कमरे से मुझे उठा ले गए। झेलम-सतलुज हॉस्टल वाले रास्ते में मुझ पर एक छात्र ने लोहे के रॉड से हमला किया। कमरे से खींचने के दौरान मैंने जल्दबाजी में अन्य छात्रों को बचाने के लिए कॉल किया।
- सूजल यादव, बीए, सेंटर फॉर रशियन स्ट्डीज।
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मेरे सिर पर डंडा मारा, एफबी पर मारने की रणनीति
हॉस्टल के बाहर से काफी आवाजें आ रही थी। मैंने देखा कि सूजल को भीड़ पीट रही है। सामने जेएनयू सुरक्षा कर्मी चुप खड़े थे। पूर्व वामपंथी छात्र अभिषेक कुमार सिंह सूजल यादव पर हमला कर रहा था। मेरे बीच में आने से मेरे सिर पर लोहे के रॉड से हमला किया, इससे मेरा सिर फट गया। मैंने एफआईआर भी दर्ज करवाई है।
- सात्विक राय, एमए, स्कूल ऑफ लैंग्वेज।

- भीड़ ने संघी गुंडे कहकर किया हमला
मैं आशुतोष के साथ पुलिस स्टेशन से वापस आ रही थी। अचानक भीड़ मारो-मारो एबीवीपी के संघी गुंडे हैं कहकर पीछे भागने लगी। भीड़ में मौजूद लोगों के हाथों में डंडे थे। बाइक जंगल की ओर कर दी, इसी बीच किसी ने मेरी जांघ पर डंडा मारकर गिरा दिया।
-निहारिका झा, जर्मन सेंटर।
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- मैं तो अपने साथियें की आवाज सुनकर बाहर आया था
वामपंथी छात्रों से पूछना चाहता हूं कि एक दिव्यांग व आंखों से कम दिखने वाला छात्र उनके लिए कैसे खतरा हो सकता है? मुझ पर हमला किया तो क्या मैं किसी से मारपीट कर सकता हूं। हॉस्टल में अपने साथियों की आवाज सुनकर बाहर आया और भीड़ ने हमला कर दिया। एम्स में दो दिन एडमिट रहने के दौरान विश्वविद्यालय प्रबंधन से किसी ने आकर हालचाल नहीं पूछा।
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- सुशील कुमार, पीएचडी, स्कूलऑफ लैंग्वेज।
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-कैंपस में शांति बहाल करने की अपील
जेएनयू प्रबंधन ने मंगलवार को शिक्षकों और छात्रों से शांति बहाल करने की अपील रखी है। शिक्षकों व छात्रों के नाम सार्वजनिक सूचना में हिंसा पर चिंता जताते हुए कक्षा शुरू करने का निर्देश दिया है। यदि कोई छात्र या शिक्षक कक्षा नहीं लेता है और हिंसा या विरोध में शामिल होता है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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