भूमि आवंटन में गड़बड़ी करने पर दो सर्वे अमीन निलंबित
- तत्कालीन तहसीलदार पर कार्रवाई की सिफारिश
- बिसरख में बिना अधिग्रहित जमीन बिल्डर को की आवंटित
ग्रेटर नोएडा। बिसरख में अधिग्रहण किए बिना ही बिल्डर को जमीन आवंटित करने के मामले में ग्रेनो प्राधिकरण ने तत्कालीन तहसीलदार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन व राजस्व परिषद को पत्र लिखा है। जबकि मामले में दोषी पाए जाने पर दो सर्वे अमीन को निलंबित कर दिया है। प्राधिकरण ने यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अदालत द्वारा मामले में मुकदमा दर्ज कराने के बाद की है।
ग्रेनो प्राधिकरण ने 2009 में बिसरख गांव में जमीन का अधिग्रहण किया था। गांव की शशि और मुक्ता मोहिनी के नाम 3350 वर्ग मीटर जमीन आबादी में छूटी थी। दोनों ने जमीन देखरेख बिसरख के कुलदीप भाटी को सौंप रखी थी। आरोप है कि बिना अधिग्रहण किए ही जमीन 25 मार्च 2011 में बिल्डर को आवंटित कर दी गई। 2016 में बिल्डर और प्राधिकरण के कर्मचारी जमीन से कब्जा हटाने पहुंचे तो पीड़ित ने प्राधिकरण के सामने अपना पक्ष रखा। इस पर उसे दूसरी जगह उतनी ही जमीन का देने का भरोसा दिया गया। मामले को लेकर कुलदीप प्राधिकरण के चक्कर काटते रहे। 15 जनवरी 2019 को मामले की सुनवाई प्राधिकरण में हुई। आरोप लगाया कि यहां भी उनसे रिश्वत मांगी गई। इस पर कुलदीप ने भ्रष्टाचार निवारण अदालत में मामला दर्ज कराया। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ रमारमण समेत कई अफसरों के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए कहा है।
इसके बाद प्राधिकरण ने अपने स्तर पर मामले की जांच शुरू कराई। इसके लिए नियोजन, भूलेख व परियोजना विभाग के अधिकारियों की एक कमेटी बनाई गई। कमेटी ने जांच के बाद रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी। जिसमें तत्कालीन तहसीलदार मनोज कुमार सिंह और प्राधिकरण में तैनात सर्वे अमीन देवेंद्र प्रताप सिंह व श्रीपाल सिंह दोषी पाया गया। कार्रवाई करते हुए प्राधिकरण ने दोनों सर्वे अमीन को निलंबित कर दिया है। इसके बाद एसीईओ दीपचंद दोनों पर विभागीय कार्रवाई करेंगे। इसके अलावा तत्कालीन तहसीलदार पर कार्रवाई की सिफारिश शासन को भेज दी गई है। राजस्व परिषद को भी पत्र लिखा गया है। मामले में कुलदीप का कहना है कि दोषी उच्च अफसरों को बचाने की कोशिश की जा रही है। जबकि निर्दोष लोगों पर कार्रवाई की जा रही है।
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बिसरख में जमीन आवंटन मामले में दो सर्वे अमीन निलंबित किए गए हैं। एक तत्कालीन तहसीलदार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया है।
- केके गुप्ता, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी