माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अदालत ने 71 लाख रुपये की साइबर ठगी से जुड़े मामले में आरोपी यशवंत कुशवाहा व सत्यवंत कुशवाहा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध से संबंधित है।
प्रकरण के अनुसार शिकायतकर्ता कंपनी स्पाइस मनी लिमिटेड ने साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके डिजिटल वॉलेट और व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ी का लाभ उठाकर आरोपी यशवंत कुशवाहा, सत्यवंत कुशवाहा और सह-आरोपियों ने हेराफेरी की। आरोपी खुदरा विक्रेता और वितरक के रूप में कंपनी के साथ जुड़े थे और डिजिटल भुगतान सेवाएं प्रदान करते थे। तकनीकी खामी के चलते कुछ लेनदेन असफल हुए, लेकिन उन असफल लेनदेन की राशि कंपनी के सिस्टम द्वारा गलती से आरोपी के वॉलेट में क्रेडिट होती चली गई थी। आरोपियों ने इस गलती का फायदा उठाते हुए त्वरित रूप से कई लेनदेन कर लगभग 71 लाख रुपये निकाल लिए। जब आरोपी से संपर्क किया गया तो उसकी कंपनी पर ताला मिला और वह गायब है।
आरोपियों ने अधिवक्ता से तर्क दिया कि व्यवसायिक लेनदेन के दौरान तकनीकी गलती से हुई राशि स्वतः क्रेडिट हुई थी। उनका सिस्टम पर कोई नियंत्रण नहीं था और मामला दीवानी का है।तकनीकी त्रुटि को आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। वहीं अभियोजन और वादी पक्ष ने कहा कि सह-आरोपियों की जमानत पहले ही निरस्त हो चुकी है। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी राशि का उपयोग बिना सूचना अपराध के गंभीर स्वरूप को दर्शाता है। अग्रिम जमानत असाधारण परिस्थिति में ही दी जा सकती है, इस मामले में ऐसा कोई आधार नहीं है। इसलिए जमानत नहीं दी।