माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। करीब 13 वर्ष पुराने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक चर्चित मामले में अदालत ने पति द्वारा लगाए गए आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में साबित न मानते हुए तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा।
मामले में परिवादी उमाशंकर झा ने वर्ष 2012 में शिकायत दाखिल करते हुए आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी वर्ष 2011 से सेक्टर-45 स्थित कांशीराम आवासीय कॉलोनी में रहने वाले एक व्यक्ति के साथ रहने लगी थीं। जब वह पत्नी को वापस लाने पहुंचे तो दो लोगों ने उनके साथ मारपीट की वहीं पत्नी ने अवैध रूप से दूसरी शादी कर ली। इस आधार पर अदालत ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में विचारण शुरू किया।
सुनवाई के दौरान परिवादी ने स्वयं सहित अपने परिजनों को गवाह के रूप में पेश किया। वहीं बचाव पक्ष की ओर से महिला और आरोपी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच पहले से घरेलू विवाद चल रहा था। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए। मारपीट की घटना के संबंध में स्वतंत्र और निष्पक्ष गवाह प्रस्तुत नहीं किए गए। इसी प्रकार दूसरी शादी के आरोप को सिद्ध करने के लिए भी पर्याप्त कानूनी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किए गए। चूंकि इस मामले में अभियोजन पक्ष ऐसा करने में विफल रहा, इसलिए तीन आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया गया।