नई दिल्ली। अदालत ने खरीदारों से धोखाधड़ी के मामले में रियल एस्टेट कंपनी के दो निदेशकों को जमानत देने से इनकार कर दिया। इन पर आरोप है कि नोएडा की उन जमीनों पर प्रोजेक्ट शुरू किए जो इनके नाम पर नहीं थीं। इसके बाद उन्होंने जरूरी सरकारी अनुमति के बिना ही इनकी यूनिटें खरीदारों को बेच दीं।
अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी अभिलाष मल्होत्रा ने सुशांत मुतरेजा और निशांत मुतरेजा की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे आर्थिक अपराधों से सख्ती से निपटने की जरूरत है ताकि लोगों का विश्वास न्यायिक व्यवस्था में बना रहे। पहली नजर में ये साफ है कि आरोपियों की कंपनी के पास उत्तर प्रदेश में जमीनों का टाइटल नहीं था।
अदालत ने कहा कि इसके अलावा सक्षम प्राधिकारों, पर्यावरण मंत्रालय व केंद्रीय भूमिगत जल प्राधिकरण से भी जरूरी अनुमति नहीं ली गई। ये प्रोजेक्ट अवैध तरीके से लांच किए गए। कोर्ट ने ये बातेें 14 जुलाई के अपने फैसले में कहीं। ये अपराध संगठित तरीके से किया गया और कई सीधे-सादे निवेशकों से उनकी मेहनत की कमाई लेकर धोखा दिया गया।
अदालत ने कहा कि इन प्रोजेक्ट में बेहद मामूली काम हुआ और इनमें से किसी में भी खरीदारों को डिलीवरी नहीं दी गई। जो पैसा प्रोजेक्ट के लिए था उसे अवैध रूप से मुखौटा कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। ये एक गंभीर आर्थिक अपराध है क्योंकि सीधे-सादे निवेशकों से उनकी मेहनत की कमाई ठगी गई। इन तथ्यों की रोशनी में आरोपियों को जमानत देने का कोई आधार नहीं है।
पेश मामले में सैकड़ों निवेशकों ने आरोपियों के खिलाफ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के केस दर्ज करवाए थे। इनके खिलाफ 2015 और 2016 में पांच केस दर्ज किए गए थे। इनकी जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा कर रही है।
अदालती के फैसले के अनुसार पहला केस में करीब 175 निवेशकों ने करीब 20 करोड़ की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाया था। दूसरे मामले में 377 शिकायतें मिली थीं। इसमें निवेशकों ने यूपी के नोएडा के प्रोजेक्ट के संबंध में 62 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था।
वहीं तीसरे मामले में ग्रेटर नोएडा के प्रोजेक्ट के सिलसिले में 157 शिकायतें पुलिस को मिली थीं। निवेशकों से 19 करोड़ रुपये से ज्यादा लेकर उसे दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया। चौथे मामले में नोएडा के एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में 183 शिकायतें पुलिस को निवेशकों ने दी थी। इसके अलावा पांचवां मामला आगरा से जुड़ा है। ये मामला रिटर्न के झूठे आश्वासन और प्रोजेक्ट की डिलीवरी न होने से जुड़ा है।
कोर्ट के समक्ष आरोपियों के वकील ने कहा कि अगर उनके मुवक्किलों को जमानत नहीं मिलेगी तो इससे निवेशकों को नुकसान होगा क्योंकि वे प्रोजेक्ट को दोबारा चालू करने के लिए कोई प्रयास नहीं कर सकते।
वकील ने कहा कि दोनोें आरोपी 46 महीनों से जेल में हैं। - एजेंसी