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सोलांग वैली में बेटों समेत 9 घंटे तक कार में बंद रहे दंपती

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ग्रेनो वेस्ट की पैरामाउंट इमोशंस सोसाइटी निवासी अभय जैन पत्नी और बेटों के साथ मनाली में घूमते हु? - फोटो : Grnoida
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सोलांग वैली में बेटों समेत 9 घंटे तक कार में बंद रहे दंपती, मुश्किल से बचे
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ग्रेटर नोएडा। मनाली की सोलांग वैली में बर्फीली वादियों का आनंद लेना ग्रेनो वेस्ट स्थित पैरामाउंट इमोशंस सोसाइटी निवासी परिवार के लिए बेहद डरावना साबित हुआ। अचानक तेज हुई बर्फबारी से बचने के लिए दो बेटों समेत दंपती कार में बैठ तो गए, लेकिन फिर वहां से घंटों तक निकल नहीं पाए। इस दौरान मदद नहीं मिली तो बचने की उम्मीद तक छोड़ दी। हालांकि, नौ घंटे बाद एक जीप उन्हें रेस्क्यू करने पहुंची। देर रात होटल पहुंचकर परिवार ने राहत की सांस ली।
पैरामाउंट इमोशंस सोसाइटी निवासी अभय जैन पत्नी चंचल, बेटे तनिष्क (9) और मृणांक (4) के साथ मनाली घूमने गए हैं। परिवार मनाली स्थित एक होटल में ठहरा है। मंगलवार सुबह 10 बजे अभय पत्नी और बेटों के साथ सोलांग वैली चले गए। उन्होंने बताया कि रास्ते में किसी भी चेक पोस्ट पर पुलिस ने उन्हें नहीं रोका। उस समय हल्की बर्फबारी हो रही थी। दोपहर 3 बजे सोलांग वैली में बर्फबारी काफी तेज हो गई। बर्फबारी से बचने के लिए वह परिवार समेत पार्किंग में खड़ी कार के अंदर बैठ गए। कुछ ही देर में वहां काफी बर्फ जमा हो गई और निकलना मुश्किल हो गया। जमीन पर दो से तीन फुट तक बर्फ जम गई। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस और प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन सभी ने बर्फबारी बंद होने पर ही वहां पहुंचने की बात कही। मदद के इंतजार में रात के 12 बजे गए। इसके बाद एक न्यूज चैनल की रेस्क्यू जीप वहां पहुंची। जीप में सवार लोगों ने रात एक बजे उन्हें वहां से निकला। इसके बाद देर रात करीब तीन बजे होटल पहुंच सके। तब जाकर सभी ने राहत की सांस ली।
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10 से 20 हजार रुपये में मिल रही थी मदद
अभय जैन ने बताया कि गाइड और स्थानीय लोग मदद करने पहुंचे थे, लेकिन सभी अलग-अलग कीमत मांग रहे थे। कोई जीप से होटल पहुंचाने के लिए 10 हजार तो कोई 20 हजार रुपये मांग रहा था। कई परिवारों ने मदद भी ली। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू के दौरान कार वहीं छोड़ दी थी। बुधवार को 5000 रुपये देकर वहां कार मंगवाई।
40 रुपये में मिली चाय, बिस्कुट खाकर मिटाई भूख
परिवार ने बताया कि सुबह होटल से नाश्ता करके निकले थे। इसके बाद कुछ नहीं खाया। बर्फबारी में फंसने के बाद खाने को कुछ नहीं मिला। कार में कुछ बिस्कुट रखे थे। पहले बच्चों को खिलाया। रात 10 बजे एक स्थानीय निवासी चाय लेकर पहुंचा। उसने 40 रुपये में एक चाय और दस रुपये वाला बिस्कुट का पैकेट 50 रुपये में दिया। पूरे दिन भूखे रहने के बाद रात तीन बजे होटल आकर खाना खाया।
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सोशल मीडिया ने बचा ली जान
अभय जैन ने बताया कि फंसने के बाद ट्विटर पर ट्वीट कर मदद मांगी। ट्वीट करने के बाद ग्रेनो वेस्ट के लोगों ने री-ट्वीट करना शुरू कर दिया। इससे स्थानीय प्रशासन तक मामला पहुंच गया। नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार व राहुल गर्ग ने उनकी काफी मदद की। आईटीबीपी के एक अधिकारी ने खाना भी भिजवाया, लेकिन तब तक होटल पहुंच चुके थे। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया की मदद से सभी की जान बच सकी। उनकी तरह कई लोग वहां फंसे थे।
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