पिछले दिनों गुरमुरा क्षेत्र में बगैर मान्यता के संचालित विद्यालय पर गिरी बिजली और दो छात्रों की मौत के बाद संवेदनशील इलाकों में स्थित परिषदीय विद्यालयों में तड़ित चालक यंत्र लगाने की पहल शुरू कर दी गई है।
फिलहाल बीएसए स्तर से खंड शिक्षा अधिकारियों को सर्वे के निर्देश जारी किए गए हैं। सर्वे के बाद बजट का निर्धारण कर प्रस्ताव निदेशालय को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी-बजट मिलने के बाद चिन्हित किए गए विद्यालयों में तड़ित चालक संयंत्र स्थापित कराए जाएंगे।
बताते चलें कि शक्ति आनंद की तरफ से आईजीआरएस के जरिए डीएम से सभी विद्यालयों में तड़ित चालक यंत्र लगवाने की मांग की गई थी। इस पर उन्होंने बीएसए को पहल का निर्देश दिया।
इसको लेकर गत बृहस्पतिवार को डीएम को भेजी गई आख्या में बीएसए की तरफ से कहा गया कि जिले में संचालित परिषदीय विद्यालयों में तड़ित चालक यंत्र लगाने के लिए किसी प्रकार की कार्ययोजना या बजट स्वीकृत नही हैं।
आई शिकायत के क्रम में खण्ड शिक्षा अधिकारियों को बिजली गिरने के मामले में संवेदनशील एरिया स्थित परिषदीय विद्यालयों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। बीएसए मुकुल आनंद पांडेय के मुताबिक बीईओ की ओर से सर्वे कर सूची उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके बाद कार्ययोजना बनाकर बनाई जाएगी। इसके जरिए निदेशालय से बजट मांगा जाएगा। स्वीकृति प्राप्त होने पर चिन्हित विद्यालयों में तड़ित चालक यंत्र लगाने की कार्रवाई की जाएगी।
कोल प्रोजेक्ट प्रबंधन का दावा, नाऊ टोला का नहीं होगा विस्थापन
एनसीएल के खड़िया कोल प्रोजेक्ट प्रबंधन ने एक पत्र के जरिए कहा है कि शशक्तिनगर क्षेत्र स्थित नाऊ टोला का विस्थापन नहीं किया जाएगा। इसको लेकर जानकारी दी गई है कि खड़िया परियोजना के जरिए निकट भविष्य में नाऊ टोला के आसपास किसी तरह का खनन कार्य संभावित नहीं है, इसलिए नाऊ टोला का विस्थापन किया जाना संभव नहीं है। दावा किया गया कि जल निकासी, सड़क मरम्मत अैर सुरक्षा दीवार का निर्माण पूर्व में कराया जा चुका है। आगे भी जरूरत अनुसार जनप्रतिनिधियों की मांग पर सीएसआर के जरिए कराया जाएगा। बस्ती को खड़िया परियोजना की कार्य-सीमा से बाहर होने की भी बात कही गई है। बताते चलें कि बारिश के समय मलबे के रूप में बस्ती में आकर पटने वाले ओवरबर्डन के मलबे को देखते हुए विस्थापन की मांग उठाई जा रही है।