नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) की अक्तूबर 2018 व अगस्त 2019 की प्राथमिक शिक्षक भर्ती संबंधी परीक्षाओं में जातिसूचक सवाल पूछे जाने के मामले में एफआईआर का आदेश खारिज करने से इनकार कर दिया है। निचली अदालत ने अधिवक्ता सत्यप्रकाश गौतम की शिकायत पर सुनवाई के बाद 17 फरवरी 2021 को एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उक्त दो परीक्षाओं में पूछे गए सवाल निसंदेह पहली नजर में जानबूझकर एससी-एसटी समुदाय को सार्वजनिक तौर पर अपमानित अथवा धमकाने के दायरे में आते हैं।
न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने अपने फैसले में कहा कि जिन दोनों जातियों से संबंधित सवाल पूछे गए वे दोनों अनुसूचित जातियों की श्रेणी में आती हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के मद्देनजर उनके नामों का प्रयोग डीएसएसएसबी परीक्षा के प्रश्नपत्र में प्रयोग की अनुमति नहीं है। हालांकि डीएसएसएसबी को प्रश्नपत्रों की सामग्री की जानकारी थी या नहीं, ये केवल जांच से ही पता चल सकता है।
हालांकि हाईकोर्ट ने निचली अदालत की उन टिप्पणियों पर रोक लगा दी है जिनमें कहा गया था कि वादी (डीएसएसएसबी) द्वारा कई संज्ञेय अपराध किए जाने का पता चलता है और इसकी जांच जरूरी है। इसकी जांच एफआईआर के बाद जांच होने पर ही हो सकती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल ये नहीं कहा जा सकता कि इन सवालों से संबंधित रिपोर्ट मीडिया में पढ़ने के बाद शिकायतकर्ता गौतम को मानसिक या भावनात्मक हानि नहीं पहुंची थी। -एजेंसी