फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Noida News: भवन निर्माण में मिली खामियां की शिकायत को उपभोक्ता आयोग ने किया खारिज

विज्ञापन
विज्ञापन
- आयोग ने कहा, मामला सरकारी नीति और कोर्ट के आदेश से जुड़ा है
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की आवासीय योजना में मकान आवंटित किए जाने के बाद निर्माण में गंभीर खामियां मिलने और मुआवजे की मांग के बावजूद उपभोक्ता फोरम ने शिकायतकर्ता को राहत देने से इंकार कर दिया है। आयोग ने साफ कहा कि यह मामला उपभोक्ता विवाद का नहीं है, बल्कि सरकारी नीति और कोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन से जुड़ा है।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पी-1 निवासी सचिव गोयल ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि 2007 में ओमिक्रॉन-1ए सेक्टर में उन्हें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मकान संख्या 85, ब्लॉक-डी आवंटित किया। कुल 36.08 लाख रुपये की राशि भुगतान करने के बाद 2012 में उन्हें मकान का कब्जा और पंजीकृत लीज डीड कराई गई। कब्जा लेने के बाद पाया गया कि मकान में निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब थी। दरवाजों में दीमक, घटिया विद्युत फिटिंग और अन्य खामियों के कारण उन्हें करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ। साथ ही, उन्होंने कब्जा मिलने में देरी का हवाला देते हुए अतिरिक्त 2.12 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

सचिन गोयल ने मार्च 2018 में प्राधिकरण को पत्र भेजकर कुल 12.12 लाख रुपये मुआवजा मांगा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उल्टा, प्राधिकरण ने सितंबर 2013 और नवंबर 2017 में दो बार कुल 4.52 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग भेज दी। इसमें किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने के हाईकोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया था। जिला उपभोक्ता आयोग में सुनवाई के दौरान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मकान मानकों के अनुसार बना था, और कब्जा लेते समय कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी। अतिरिक्त राशि की मांग कोर्ट के आदेश के अनुसार की गई है। साथ ही, आवंटी ने लीज डीड के समय यह हलफनामा दिया था कि भविष्य में देय किसी भी राशि का भुगतान करेगा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने माना कि यह मामला सरकारी नीति और न्यायालय के आदेश की व्याख्या से जुड़ा है। इसलिए इसे उपभोक्ता विवाद के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह मामला सिविल या प्रशासनिक क्षेत्राधिकार में आता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें