नई दिल्ली। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट के लावारिस कुत्तों को शेल्टर होम से रिहा करने के आदेश को मानवीय और संतुलित फैसला बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर राजधानी में कुत्तों की संख्या इतनी कैसे बढ़ी। उन्होंने कहा कि 2013 में जहां 60,000 लावारिस कुत्ते थे, 2025 में यह आंकड़ा 10 लाख तक पहुंच जाना एमसीडी की नाकामी का सबूत है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार (1998–2013) और एमसीडी में कांग्रेस कार्यकाल (2002–2007) के दौरान नसबंदी और टीकाकरण से कुत्तों की संख्या पर काबू था। लेकिन 2007 से 2022 तक एमसीडी भाजपा और दिल्ली में 2014 से 2025 तक आम आदमी पार्टी का शासन रहने के दौरान इस पर ध्यान नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप हर साल करीब एक लाख कुत्तों की संख्या बढ़ती रही और डॉग बाइट व रेबीज से मौतों में तेजी आई। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर कुत्तों को हटाने की बजाय एमसीडी और सरकार को अपशिष्ट प्रबंधन, सामूहिक टीकाकरण और नसबंदी कार्यक्रम जैसे उपायों पर ध्यान देना चाहिए। ब्यूरो