संपत्ति के साथ किराए की रकम के खुलासे का भ्रम बना जनगणना में बाधा
-नोएडा के गांव में जगनणना में नहीं मिल रहे सही आकड़ें, कई लोग खुद नहीं दे रहे जानकारी और न ही किराएदारों को देने दे रहे
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा के ग्रामीण इलाकों में चल रहे जनगणना कार्य में एक अजीबोगरीब संकट खड़ा हो गया है। शहर के कई गांवों के निवासियों के बीच अपने मकानों की संख्या और किराएदारों से होने वाली कमाई (कमर्शियल इनकम) के खुलासे को लेकर गहरा भ्रम और डर फैल गया है। इस डर की वजह से मकान मालिक न तो खुद प्रगणकों को सही जानकारी दे रहे हैं और न ही अपनी बहुमंजिला इमारतों में रह रहे सैकड़ों किराएदारों को आंकड़े दर्ज कराने दे रहे हैं।
जनगणना अधिकारी व नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ वंदना त्रिपाठी ने बताया कि पूरे शहर में अब तक 2300 से ज्यादा हाउस लिस्टेड ब्लॉक (एचएलबी) चिह्नित किए गए हैं। तकरीबन सभी ब्लॉकों में प्रगणक व सुपरवाइजर का दौरा पूरा हो चुका है। तय मानकों के अनुसार, एक एचएलबी में घरों की संख्या का औसत 150 से 200 होता है, जबकि आबादी का औसत 800 से 1000 के बीच रहता है। एसीईओ ने बताया कि घर-घर जाकर किए गए इस सर्वे के बाद 30 से ज्यादा ऐसे एचएलबी सामने आए हैं, जहां या तो घरों में ताला बंद होने की सूचना मिली है या फिर वहां आबादी का आंकड़ा 300 से भी कम दर्ज किया गया है। आंकड़ों में आई इस असमानता को देखते हुए अब इन सभी संदिग्ध ब्लॉक्स का फिर से सत्यापन करवाया जा रहा है।
गांव की ऊंची इमारतों में सैंकड़ों किराएदार
ममूरा, बिशुनपुरा, नवादा, गिझोड़, चौड़ा रघुनाथपुर, बहलोलपुर, गढ़ी चौखंडी, सर्फाबाद, बरौला, सलारपुर, भंगेल समेत अन्य गांव में लाखों की संख्या में किराएदार हैं। इनमें कुछ पुराने या मूल निवासी हैं जिनके कई बहुमंजिला मकान बने हुए हैं। 4-5 मंजिल के बड़े-बड़े मकानों में सैंकड़ों की संख्या में बने कमरों में अलग-अलग किराएदार रहते हैं। जो कंपनियों में नौकरी या दिहाड़ी मजदूरी, रेहड़ी-पटरी लगाते हैं।
जनगणना का ब्यौरा पूरी तरह से गोपनीय है। गांव के निवासियों से अपील है कि किसी भी भ्रम या अफवाह पर गौर न करें। सही जानकारी दें।- वंदना त्रिपाठी, जनगणना अधिकारी, नोएडा