नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी डॉक्टर को अपने ही चिकित्सा केंद्र (क्लिनिक) चलाने से रोकने की जमानत शर्त उसके आजीविका के अधिकार का उल्लंघन नहीं करती। न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने यह टिप्पणी एक ऐसे डॉक्टर की याचिका पर की, जो चिकित्सा लापरवाही के एक मामले में आरोपी है।
अदालत ने कहा कि डॉक्टर अब भी किसी अन्य अस्पताल या क्लीनिक से जुड़कर अपना पेशा जारी रख सकता है। इसलिए यह कहना गलत होगा कि उसे पूरी तरह रोजगार से वंचित किया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत की शर्तें जांच को निष्पक्ष रखने और आरोपी को समान अपराध दोहराने से रोकने के लिए लगाई जाती हैं। मामले में आरोप है कि डॉक्टर एक ऐसे केंद्र का संचालन कर रहे थे, जहां अयोग्य व्यक्तियों से सर्जरी करवाई जाती थी, जिसके कारण एक मरीज की अत्यधिक रक्तस्राव से मौत हो गई। डॉक्टर ने अदालत से दो जमानत शर्तों क्लीनिक चलाने पर रोक और दिल्ली से बाहर न जाने की पाबंदी में राहत मांगी थी। लेकिन, अदालत ने कहा कि ये शर्तें उचित और आवश्यक हैं, ताकि जांच पर कोई असर न पड़े और न्याय प्रक्रिया प्रभावित न हो। संवाद