डीजीसीए की टीम ने निरीक्षण के बाद ट्रायल रन को दी हरी झंडी, रनवे को वाटर कैनन से सलामी दी
ढाई दशक की लंबी कवायद के बाद एयरपोर्ट से विमानों की आवाजाही का सपना होगा साकार
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10 मिनट में दिल्ली से उड़कर एयरपोर्ट के फ्लाइंग जोन में पहुंचेगा विमान
2050 तक हर साल सात करोड़ यात्रियों की आवाजाही को पूरा करेगा एयरपोर्ट
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा।
क्रिसमस से एक पखवाड़ा पहले ही बड़ा दिन मनाने के लिए तैयार हो चुके नोएडा एयरपोर्ट के रनवे पर सोमवार को पहली बार विमान उतरेगा। दिल्ली से उड़ान भरकर पहला व्यावसायिक विमान 10 मिनट में एयरपोर्ट के फ्लाइंग जोन में पहुंचेगा और उपकरणों सहित अन्य संसाधनों की जांच के लिए डेढ़ घंटे तक एयरपोर्ट के आसपास मंडराता रहेगा।
इस पूरी कवायद के बाद क्रू मेंबर के साथ एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) का विमान रनवे पर पहली लैंडिंग करेगा। इसके साथ ही एयरपोर्ट के इतिहास में ढाई दशक की कवायद के बाद एक और सफलता जुड़ जाएगी। यहां विमान की सफल लैंडिंग के बाद विमान कुछ घंटे बाद ही टेक ऑफ भी करेगा। फिलहाल, इस बड़ी उपलब्धि से पहले रविवार को रनवे को वाटर कैनन से सलामी भी दी गई। ट्रायल रन से पहले विमान को लैंडिंग की अनुमति के साथ ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने रनवे पर अन्य सुरक्षा उपकरणों का निरीक्षण कर रिपोर्ट दे दी है। इस ट्रायल के बाद यापल वाई अड्डे के प्रमाणीकरण के लिए दस्तावेज को अंतिम रूप देगा और डीजीसीए को सौंप देगा। एयरपोर्ट से उड़ान संचालन शुरू होने से पहले एयरपोर्ट को डीजीसीए और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) दोनों की ओर से प्रमाणीकरण की आवश्यकता होगी। इन प्रमाणीकरण के लिए समयसीमा का निर्धारण भी किया गया है।
घने कोहरे और अंधेरे में भी होगी आसान लैडिंग
ट्रायल के लिए डीजीसीए से 15 दिसंबर तक की समयसीमा तय की गई है। एयरपोर्ट पर कैट-1 और कैट-3 उपकरण स्थापित हो चुके हैं, जो कोहरे में विमान की ऊंचाई और दृश्यता की जानकारी देते हैं। एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) को स्थापित किया जा चुका है, जिसकी एयरक्राफ्ट बीच किंग एयर 360 ईआर के जरिये 10 से 14 अक्तूबर तक जांच की जा चुकी है। 3900 मीटर लंबा व 60 मीटर चौड़ा पहला रनवे बनकर पूरी तरह से तैयार है। रनवे पर मार्किंग और लाइटिंग का कार्य पूरा हो चुका है। एयरपोर्ट पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) को स्थापित किया जा चुका है। एयरपोर्ट का पहला चरण 1334 हेक्टेयर में तैयार हो रहा है। इसकी यात्री क्षमता प्रति वर्ष 1.2 करोड़ होगी। चार चरणों में इसका विस्तार किया जाएगा। 2050 तक एयरपोर्ट पूरी तरह संचालित होने पर हर साल सात करोड़ यात्रियों की आवाजाही क्षमता को पूरा करेगा।
एयरपोर्ट की उपलब्धियों पर एक नजर
- आईएलएस कैलिब्रेशन का कार्य 10 से 14 अक्तूबर तक हुआ।
- कैलिब्रेशन का सर्टिफिकेट भी यापल को प्राप्त हो चुका है।
- फ्लाइट ट्रायल की मंजूरी डीजीसीए से प्राप्त हुई।
- एयरोड्रोम लाइसेंस के लिए आवेदन इसी माह होगा।
- एआईपी पब्लिकेशन 6 फरवरी को होगा।
- 6 फरवरी के बाद फ्लाइट के लिए टिकट बुकिंग शुरू होगी।
- 17 अप्रैल तक एयरपोर्ट से व्यावसायिक फ्लाइट शुरू हो जाएगी।
एयरपोर्ट के रनवे पर सोमवार को पहली बार विमान उतरेगा। एएआई का विमान करीब डेढ़ घंटे तक सभी उपकरणों व रडार सिस्टम की जांच करेगा। एयरोड्रोम लाइसेंस के लिए इसकी रिपोर्ट डीजीसीए को भेजी जाएगी।
- शैलेंद्र भाटिया, नोडल अधिकारी, नायल