- बुधवार शाम से बृहस्पतिवार दोपहर तक हुई बरसात से थमी रफ्तार, शहरवासी परेशान
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा/ग्रेटर नोएडा/ यमुना सिटी। बुधवार शाम से बृहस्पतिवार दोपहर तक हुई बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बृहस्पतिवार को जिले के ज्यादातर इलाकों में लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ा। सड़क, पार्क, परिसर, सेक्टर, सोसाइटी, अंडरपास पानी में डूबे नजर आए। कई जगह दो से 3 फीट तक पानी भर गया। बारिश की वजह से यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। सुबह बच्चे जूझते हुए स्कूल पहुंचे वहीं बड़ी तादाद में नौकरीपेशा कार्यालय में समय से नहीं पहुंच सके। बरसात का असर उद्योगों में भी उत्पादन पड़ा। वहीं श्रमिकों के नहीं पहुंचने की वजह से जिले के करीब 50 फीसदी औद्योगिक इकाइयों में कामकाज ठप रहा। वहीं स्कूलों में 20 से 30 फीसदी तक उपस्थिति दर्ज की गई।
सबसे बुरा हाल ग्रेनो वेस्ट और सेक्टर इकोटेक-3 एरिया रहा। ग्रेनो वेस्ट में सोसाइटियों के बाहर की सड़कें पूरी तरह पानी में डूबी रही। जबकि औद्योगिक सेक्टर इकोटेक-3 में 2 से 3 फीट पानी भर गया। जगह-जगह बाइक और कार पानी में फंसकर खराब हो गई। यूपीसीडा की सूरजपुर साइट-बी व सी, साइट 4 व 5 का भी ऐसा ही हाल रहा। हल्दौनी मोड पर 3 फीट तक पानी जमा हो गया। यहां वाहनों की लंबी लाइन लग गई। जाम के कारण वाहनों को दूसरे रास्तों से निकाला गया। सूरजपुर कस्बे का मुख्य मार्ग पानी में डूब गया। तिलपता गांव में भी डीएससी रोड पूरी तरह पानी में डूब रहा। अंसल ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी भी लबालब रही। उधर ग्रेनो वेस्ट के सभी सेक्टरों में जलभराव की समस्या रही। इस कारण लोग सोसाइटियों से बाहर नहीं निकल सके। टेकजोन-4, सेक्टर 16, 16 बी, 16सी व 4 की सड़कें से पानी नहीं निकल सका। नाले और नालियां गंदगी से अटे होने के कारण पानी नहीं निकल सका। लोगों ने प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
ट्रैफिक सिग्नल भी हुआ ठप
जलभराव ने वाहनों की रफ्तार थाम दी। ग्रेनो वेस्ट के किसान चौक पर वाहनों की लंबी लाइन देखने को मिली। पर्थला से किसान चौक होकर गाजियाबाद की तरफ जाने वाली सड़क पूरी तरह से जाम रही। वाहनों की लंबी लाइन रही। वहीं किसान चौक से शाहबेरी गोल चक्कर की तरफ वाली सड़क पर भी वाहनों की रफ्तार धीमी रही। हल्दौनी व तिलपता में जाम ने लोगों को परेशान किया। वहीं राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल, सेक्टर-18, महामाया फ्लाईओवर, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे सहित कई प्रमुख मार्गों पर भी जलभराव के कारण घंटों यातायात प्रभावित रहा। बारिश के चलते शहर में ट्रैफिक सिग्नल ठप हो गए। चारों ओर से एक साथ वाहन गुजरते रहे। सिग्नल की आपूर्ति ठप होने के कारण ये स्थिति बनी। इस वजह से सड़कों पर लंबा जाम लग गया। बारिश के चलते विश्वकर्मा रोड पर सेक्टर 52 तक लंबा जाम लग गया। लेन के दोनों छोर पर इतना भर गया कि सड़कों पर वाहन थम गए। सुबह के समय मानो पूरा शहर थम गया हो। हर सड़क पर वाहनों की कतार लग गई। डी पार्क वाले मार्ग पर भी लंबा जाम लग गया। पर्थला रोड पर भी जलभराव होने के कारण वाहनों को गुजरने में दिक्कतें हुईं। सेक्टर 15 के सामने स्थित मार्ग पर वाहनों की कतार लग गई। महामाया फ्लाईओवर, नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे, छिजारसी, सेेक्टर 63 समेत अधिकांश मार्ग पर वाहन फंसे रहे।
अंडरपास में भरा पानी, वाहन फंसे
गुलिस्तानपुर, मकोड़ा और 130 मीटर रोड के चारों अंडरपास में जलभराव हो गया। वाहन चालक वहां से निकले, लेकिन काफी के वाहन खराब हो गए। बड़ी मुश्किल से पानी से वाहनों को निकाला गया। गाजियाबाद से जोड़ने वाले मॉडल टाउन अंडरपास में तो पानी भर जाने के कारण कार और दो पहिया वाहन आधे रास्ते में ही थम गए। तीन फीट से ज्यादा पानी अंडरपास में भर गया। सेक्टर 96 हो या सेक्टर 145 पर एक्सप्रेसवे के अंडरपास में चार फीट तक पानी भर गया। इतना पानी भर जाने के कारण एक छोर से दूसरी ओर जाना ही मुश्किल हो गया। प्राधिकरण की तैयारियां भी बारिश के सामने में पानी मांगती नजर आईं। अंडरपास में लगे सेंसर युक्त पंप भी भरे हुए पानी को निकालने में जवाब दे गए। पानी निकालने के लिए प्राधिकरण को अलग से पंप लगाने पड़े। जिसके बाद वाहन गुजर सके।
बरसात के जल भराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त
दादरी। नगर को ग्रेटर नोएडा से जोड़ने वाले रेलवे रोड जलभराव होने से नाले में तब्दील हो गया है। लोगों का घरों से निकलना भी दूभर हो गया। रेलवे रोड पर दो से तीन फीट पानी जमा हो गया। आने जाने वाले वाहन चालकों को निर्माणाधीन सड़क के किनारों का भी पता नहीं चल रहा है। जिससे वाहन सड़क किनारों के नीचे सड़क पर गिर रहे हैं। दो पहिया वाहन व कार पानी में खराब हो गए। निवासी नगर पालिका परिषद की व्यवस्था से नाराज है।
प्राधिकरण की लापरवाही से बारिश में डूबा शहर
- 8000 करोड़ रुपये हर साल विकास के नाम पर खर्च करता है प्राधिकरण, 10 करोड़ रुपये से की गई थी नालों की सफाई
नोएडा। प्राधिकरण की सुस्त कार्यशैली की वजह से हर साल की तरह इस बार भी बारिश में शहर की सड़कें, चौराहे और अंडरपास जलमग्न हो गए। जिन स्थानों को हर मानसून से पहले संवेदनशील मानकर विशेष तैयारी के दावे किए जाते हैं, वहीं सबसे अधिक जलभराव देखने को मिला। हर वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई, जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और सभी पंपों की टेस्टिंग के दावे किए जाते हैं। इस बार भी प्राधिकरण ने तैयारियां पूरी होने का दावा किया था जो तेज बारिश में बह गए। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। शहर में छोटे-बड़े कुल 190 नाले हैं जिनकी लंबाई 354.66 किमी है। प्राधिकरण ठेकेदारों ने बीते माह नालों की सफाई का काम शुरू किया। नालों की सफाई का काम सिर्फ औचारिकता के रूप में निपटाया गया। ब्यूरो