सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो में टीम के सदस्यों ने स्कूल के शिक्षकों से पूछा कि प्रवेश क्यों नहीं मिल रहा है। तो शिक्षकों ने बताया कि बीएसए का आदेश है कि किसी को भी अंदर नहीं आने दिया जाए। बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। इसके बाद दास ने स्कूलों की व्यवस्था और निरीक्षण में कथित रोक को लेकर सवाल खड़े किए है। सौरव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्कूल को शिक्षा का मंदिर भी कहा जाता हैं, लेकिन यूपी सरकार ने ग्रेटर नोएडा के सारे मंदिरों पर ताले लगा दिए गए हैं। ऐसा भय क्यों हैं यूपी सरकार को?
सौरव दास ने कहा कि उनका उद्देश्य यह देखना था कि सरकारी स्कूलों में बच्चे किन परिस्थितियों में पढ़ रहे हैं और उन्हें शौचालय, कक्षाएं, साफ-सफाई समेत बुनियादी सुविधाएं कैसी मिल रही हैं। इससे पहले टीम को पिछले दिनों नोएडा के गढ़ी चौखंडी के एक प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश मिला था। वहां की व्यवस्थाएं देखने के बाद टीम अन्य स्कूलों में पहुंची, लेकिन तीन स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया गया। वहीं निवासियों ने सौरभ दास से मौके पर कहा कि उनके स्कूलों में सुविधाएं काफी बेहतर है। किराएदार क्या बताएंगे। इसी दौरान स्थानीय निवासियों से सीजेपी के पदाधिकारियों से धक्कामुक्की भी हो गई। विरोध करने वाले लोगों का कहना था कि जांच करने वाले आप लोग कौन होते हो? हमें दिक्कत होगी तो शिकायत करेंगे।
देवला के विकास पर खड़े किए सवाल
सौरभ दास ने गांव में फैली गंदगी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बच्चों से बातचीत करते हुए पूछा कि वे ऐसी गंदगी के बीच से स्कूल कैसे आते-जाते हैं। इस दौरान ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों की गांव में मौजूदगी को लेकर भी शिकायतें कीं। दास ने सांसद डॉ. महेश शर्मा को निशाने पर लेते हुए विकास और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए। दास ने कहा कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखने से किसी को क्यों रोका जा रहा है।
मकौड़ा और जैतपुर वैशपुर में बेहतर हैं सुविधाएं
अमर उजाला की टीम ने भी निवासियों से मौके पर जाकर बातचीत की। इसके साथ ही स्कूलों की स्थिति का भी जायजा लिया। दोनों स्कूलों में छात्रों को निजी स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं मिल रही हैं। वहीं देवला में रास्ते खराब होने के कारण बच्चों को प्रतिदिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार निवासी भी सड़कों को बनाने की मांग कर चुके हैं।
स्कूल में प्रवेश पर सामान्य रूप से कोई रोक नहीं है। लेकिन, 20 से 25 लोगों की भीड़ को स्कूल में कैसे जाने दिया जा सकता है। जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है। इसी वजह से जो लोग स्कूलों में पहुंचे, उनको प्रवेश नहीं दिया गया। - राहुल पंवार, बीएसए