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Noida News: फिर उठे कॉकरोच...अब मोदी सरकार को हटाने तक पहुंची मांग

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-चलो संसद मार्च की शाम धरनास्थल से हटा दिए गए थे मंच व टेंट, दोबारा पहुंचे आंदोलनकारी
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-लाठी चार्ज में घायल युवाओं को देखकर बढ़ा प्रदर्शनकारियों का आक्रोश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सीजेपी (काकरोच जनता पार्टी) आंदोलन मंगलवार को फिर उठ खड़ा हुआ। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके के आह्वान के बाद सुबह से ही बड़ी संख्या में युवा जंतर मंतर पहुंचने लगे। धरनास्थल पर मौजूद कार्यकर्ता धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से आगे बढ़कर मोदी सरकार को ही बदलने की मांग करते दिखे।

सीजेपी के चलो संसद आह्वान पर एक दिन पहले जुटे युवाओं और समर्थकों से टकराव के बाद पुलिस ने देर शाम धरना स्थल से मंच और टेंट हटा दिए थे। साथ ही जंतर मंतर को भी खाली करा दिया था। इसके बाद लग रहा था कि आंदोलन की धार कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। देर रात से ही प्रदर्शनकारी फिर से जुटने। मंगलवार सुबह 10 बजे तक युवाओं के साथ आइसा कई अन्य संस्थाओं के सदस्य धरनास्थल पर इकट्ठा हो गए और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई।
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प्रदर्शनकारियों ने युवाओं की आवाज को दबाने के लिए लाठीचार्ज कराने का आरोप केंद्र सरकार पर लगाया। सोमवार को लाठीचार्ज में घायल प्रदर्शनकारियों के धरने में पहुंचने पर वे और ज्यादा आक्रोशित हो गए। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ-साथ मोदी सरकार के हटने तक आंदोलन के नारे लगाने शुरू कर दिए। हालांकि, सीजेपी अभी भी पूर्व की तीनों मांग के साथ खड़ी है।
प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचे शरद पवार
सीजेपी को सपोर्ट देने के लिए मंगलवार को नेताओं की आवाजाही लगी रही। शाम को महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं। दोनों अभिजीत दीपके से मिले और समर्थन दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से छात्रों की बात सुनने की अपील की। इससे पूर्व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विशंभर प्रसाद निषाद, सांसद कृष्णा देवी के पति शिवशंकर सिंह ने उनसे मिलकर समर्थन दिया। दोनों ने बताया कि सोमवार को गोंडा में भी इसी तरह से युवाओं ने प्रदर्शन कर सीजेपी को समर्थन दिया था।
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जंतर मंतर के बाहर धारा-163
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के बाहर की सड़कों पर बीएनएस की धारा-163 लगा दी है। इस दौरान बहुत से प्रदर्शनकारी बाहर ही नारे लगाने लगे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पर ही धरना करने के निर्देश दिए और प्रदर्शनकारियों को बाहर इकट्ठा नहीं होने दिया।
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