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कोटला झील

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नूंह। वर्षों पूर्व जिले में पर्यटन, पेयजल संबंधी समस्याओं के स्थाई समाधान के लिए विकसित हो रही कोटला झील अभी भी अधर में लटकी हुई है। हालांकि झील के लिए वर्षों पूर्व ही 108 एकड़ जमीन को अधिग्रहण किया गया था। जिससे जिले में लोगों को रोजगार व अन्य संसाधनों के विकास की काफी उम्मीद जगी थी। वहीं सरकार व प्रशासन की उपेक्षा के कारण आज लोगों की उम्मीदें दम तोड़ रही है। भाजपा सरकार ने अपने बीते कार्यकाल में इस जमीन को मुआवजा तो लोगों को जरूर दिया। लेकिन जिले की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अपने दूसरे कार्यकाल में ठंडे बस्ते में डाल दिया।
बता दें, कि प्रदेश की सबसे बड़ी झीलों में शुमार नूंह की कोटला झील अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। इस झील में आसपास के नौ गावों की लगभग ढाई से तीन हजार एकड़ जमीन आती है। झील में अरावली की पहाड़ियों का पानी बड़े पैमाने पर इकट्ठा होता है। पानी के ओवरफ्लो होने परे पंप हाउस बनाकर कई नालों के माध्यम से यमुना में पहुंचाया जा सकता है। यहां तक 1977 व 1996 में रावली व कामेडा बाध टूटने से राजस्थान तक का पानी आ गया था जिसने यहां के गावों को डूबाकर तबाह कर दिया था। ऐसे में जल संरक्षण व पर्यटन विकास की यह बड़ी परियोजना आज अधूरी है।
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बन सकता है पर्यटन का बड़ा केंद्र
एनसीआर में पर्यटन के क्षेत्र का बहुत अधिक अभाव है। ऐसे में एनसीआर के साथ लगता नूंह का अरावली क्षेत्र सभी पैमानों पर खरा उतरता है। सरकार ने पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए यहां झील के विकास का कदम बढ़ाया था। अगर वास्तव में कार्य किया जाता तो अब तक पर्यटकों के लिए कोटला झील बड़ा विकल्प बन सकती थी। प्रदेश की सबसे बड़ी इस परियोजना को केवल कागजों में ही समेट कर रख दिया गया।
सिंचाई व जल संरक्षण का भी बड़ा माध्यम
अच्छी बारिश होने पर यहां 20 से 27 फीट तक पानी जमा हो जाता है जिसे बाद में पंप हाउस से बाहर निकाला जाता है। यहां हर वर्ष सैकड़ों एकड़ भूमि में पानी भरा रहता है। जिसेे ध्यान में रखते हुए जिले के लोगों की मांग पर सरकार ने 108 एकड़ जमीन अधिगृहीत की थी। घटते पेयजल स्तर की दृष्टि से देखा जाए तो खेतों की सिंचाई के साथ पीने के लिए भी पानी को इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही यह जल संरक्षण का एक बड़ा माध्यम हो सकता है। झील के विकास के बाद लोगों ने मत्स्य पालन की भी योजना बनाई थी।
क्या कहते हैं उपायुक्त ऱ्
इस बारे में उपायुक्त शक्ति सिंह ने कहा कि सरकार व जिला प्रशासन जिले के अधूरे पड़े विकास कार्यों को कराने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है। कोटला झील का भी विकास कराया जाएगा।
जल्द ही इस समस्या को मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अवगत कराया जाएगा। इस समस्या का प्राथमिकता के साथ समाधान कराया जाएगा। - नरेंद्र पटेल, भाजपा जिला अध्यक्ष नूंह।
कोटला झील विकसित होने से जिले के बेरोजगार युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सकता है। भाजपा सरकार जिले की इस बड़ी परियोजना को लेकर गंभीर नहीं है।- मामन खान, विधायक, फिरोजपुर झिरका
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इस अधूरी परियोजना को पूरा कराने के लिए डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को अवगत कराया जाएगा। नेशनल हाइवे की भांति इस परियोजना को उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पूरा करेंगे।- तैय्यब हुसैन घासेडिय़ा, जिला अध्यक्ष, जेजेपी नूंह।
इस मामले को कई बार विधानसभा में उठाया है सरकार मेवात का विकास नहीं कराना चाहती।- आफताब अहमद, विधायक नूंह।
फोटो ऱ् अधिग्रहण के बाद अधूरी पड़ी कोटला झील।
नरेंद्र पटेल भाजपा जिला अध्यक्ष, तैय्यब हुसैन घासेडिय़ा, मामन खान इंजीनियर विधायक फिरोजपुर झिरका व आफताब अहमद विधायक नूंह।
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