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-एमडीबी अपने मकसद से भटका, उसका फायदा नजर नहीं आ रहा

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उद्देश्य से भटका एमडीबी, 41 वर्षों में सिर्फ 30 बैठकें
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- मेवात क्षेत्र के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए किया गया था गठन
यूनुस अलवी
पुन्हाना। प्रदेश के सबसे पिछड़े जिले मेवात के विकास के लिए हरियाणा सरकार द्वारा गठित किया गया मेवात विकास बोर्ड (एमडीबी) अपने उद्देश्य से भटकता नजर आ रहा है। स्थिति यह है कि पिछले 41 वर्षो में एमडीबी की मात्र 30 बैठकें ही आयोजित हो सकी हैं। इसका सालाना करीब 34 करोड़ का बजट है। जिनमें से 24 करोड़ रुपये स्कूलों के संचालन और कर्मचारियों के वेतन पर खर्च हो जाता है। वहीं अब स्कूलों के हरियाणा शिक्षा विभाग में समायोजित होने के बाद यह बजट भी बंद करने का फैसला लिया गया है।
हरियाणा सरकार ने मेवात के विकास को लेकर 16 जनवरी 1980 को एमडीबी का गठन किया था। एमडीबी के गठन का मकसद शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक तौर पर मजबूत करना था। जिसमें शिक्षा, चिकित्सा, बागवानी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना व अन्य सुविधाएं देना था। बोर्ड में चेयरमैन के पद पर प्रदेश राज्यपाल, सीनियर वाइस चेयरमैन मुख्यमंत्री और नूंह क मिश्नर सचिव होते हैं। पक्ष विपक्ष के सभी विधायक, गुरुग्राम व फरीदाबाद के सांसद, पलवल व मेवात के डीसी सदस्य होते हैं।
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एमडीबी के पूर्व सदस्य एवं गांव साकरस के सरपंच फजरुद्दीन बेसर का कहना है कि मेवात विकास बोर्ड अपने मकसद से भटक गया है। बैठकों की संख्या से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मेवात के विकास के प्रति सजग नहीं है। जबकि हर वर्ष बजट को पास करने के लिए एक बैठक होना जरूरी होता है।
एमडीबी द्वारा संचालित आठ स्कूलों को सरकार बंद कर रही है। जब बोर्ड के पास अपना बजट ही नहीं होगा तो फिर इसका उद्देश्य ही क्या रह जाएगा। एमडीबी का कम से कम 100 करोड का अलग से वजट होना चाहिए। - आफताब अहमद, विधायक, नूंह
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पिछली बैठक में मेवात के उत्थान पर कार्य करने का फैसला लिया गया था। सरकार ने फैंसला लिया है जिन विषयों में मेवात पिछड़ा हुआ है, उनका सर्वे कराकर समाधान पर फोकस किया जाएगा।- नरेश सिंगला, सदस्य, एमडीबी
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