भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों का उद्देश्य इस कालजयी गीत के महत्व और स्वतंत्रता संग्राम में इसकी भूमिका को याद करना है। शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों ने वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया।
स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय (एसआरएचयू) में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के छात्र-छात्राओं और फैकल्टी सदस्यों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम गीत का गायन किया। विश्वविद्यालय अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि वंदे मातरम देश की एकता, अखंडता और स्वाभिमान का प्रतीक है।
एमआईटी ढालवाला संस्थान में एनएसएस इकाई की ओर से आयोजित कार्यक्रम में में डॉ. रितेश जोशी, राजेश सिंह चौधरी आदि उपस्थित रहे। विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने कैंप कार्यालय में राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। शिशु मंदिर के छात्रों के साथ मिलकर राष्ट्रभाव से वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया गया। इस अवसर पर सुरेंद्र प्रताप सिंह, सुमित पंवार, शिव कुमार गौतम, माधवी गुप्ता आदि उपस्थित रहे।
पंजाब सिंध क्षेत्र इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य ललितकिशोर शर्मा और शिक्षक पंकज कुमार ने छात्रों को वंदे मातरम का संक्षिप्त परिचय दिया। इस अवसर पर शिक्षिका नीलम रावत, चंद्रप्रकाश, हेमलता महर, मोनिका, मुकेश चौहान, मनोज कुमार, प्रतिभा जोशी सकलानी आदि उपस्थित रहे।