-प्रदूषण बढ़ने के साथ ही एलर्जी बढ़ने से बच्चों में बढ़ रही एडेनोइड्स की समस्या
-डॉक्टरों के मुताबिक एक महीने में बच्चों का करना पड़ रहा ऑपरेशन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कहर इस कदर बढ़ चुका है कि सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को झेलनी पड़ रही है। बच्चों में धीरे-धीरे शुरू हो रहा एडेनोइड्स गंभीर रूप ले रहा है। एडेनोइड्स से परेशान बच्चे स्लीप एप्निया सिंड्रोम से जूझ रहे हैं। लिहाजा बच्चों की सर्जरी करनी पड़ सकती है। पिछले दिनों एक बच्चे की सर्जरी होने के बाद उनके माता-पिता ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके जानकारी दी थी। इसके बाद से मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
नोएडा स्थित प्रकाश हॉस्पिटल, मानस और सुमित्रा हॉस्पिटल के ईएनटी सर्जन डॉ. विनीत गुप्ता ने बताया, नाक के पीछे गले में एक टॉन्सिल होता है जिसे एडेनोइड्स कहते हैं। सामान्य तौर पर यह इंफेक्शन की वजह से बढ़ता है, लेकिन क्रॉनिक एलर्जी होने पर भी बढ़ने लगता है इस टॉन्सिल का सबसे ज्यादा असर बच्चों की नाक पर पड़ता है। नाक बंद होने लगती है। ऐसे में बच्चों को साइनस की समस्या हो जाती है। सांस सही से नहीं आ पाती है। बार-बार जुकाम बुखार होने लगता है। यह समस्या बढ़ने पर सर्जरी की जरूरत पड़ती है। हालांकि यह समस्या एकदम से नहीं बढ़ती है। इसकी शुरुआत धीरे-धीरे होती है लेकिन 1 साल से 6 महीने में समस्या अपना रूप ले लेती है और जैसे प्रदूषण के साथ एलर्जी बढ़ती है वैसे ही ज्यादा परेशानी होने लगती है।
हर महीने हो रही तीन से चार सर्जरी
डॉ. विनीत ने बताया कि वह दो-तीन अस्पतालों में बतौर सर्जन काम करते हैं। एक महीने में ऐसी तीन से चार बच्चों की सर्जरी करनी पड़ रही हैं। दो साल से अधिक उम्र के बच्चों में यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। जब नाक बंद हो जाती है तो बच्चा सही से सो नहीं पाता है ऐसे में उसे स्लीप एप्निया सिंड्रोम हो सकता है। रात के समय सही से सांस नहीं आने की वजह से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
रात के खर्राटे लेता है बच्चा
सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. सव्यासाची सक्सेना ने बताया, यह गले की तरह ही नाक का टॉन्सिल होता है। जब यह बढ़ जाता है तो बच्चे को सांस आने में दिक्कत होने लगती है। ऐसे में रात को बच्चा खर्राटे लेता है। यह इंफेक्शन गले तक पहुंच जाता है तो खांसी भी आती है। कान में दर्द होने लगता है।
इन बातों का रखें ध्यान
-बच्चों को यदि धूल और धुएं से एलर्जी है तो उसे वहां से दूर रखें।
-घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
-घर से बाहर निकलने पर मास्क लगाएं
-नाक, कान या गले से संबंधित समस्या होने पर डॉक्टर को दिखाएं