माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के दादरी थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में कहा कि सिविल अथवा व्यावसायिक विवाद को आपराधिक रंग देकर मुकदमा दर्ज कराना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा। इसके बाद कोर्ट ने मामले में दाखिल चार्जशीट, संज्ञान आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
दादरी कोतवाली में 2025 में दर्ज केस में नेहा वशिष्ठ समेत छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद 30 दिसंबर, 2025 को चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके आधार पर 4 फरवरी, 2026 को गौतमबुद्धनगर की अदालत ने आरोपियों को तलब किया था। इसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग की। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि उन्हें फंसाया गया है और मूल विवाद आर्थिक लेनदेन और कारोबारी प्रकृति का है। विपक्ष ने पहले भी शिकायत की थी, जिसे संबंधित अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बावजूद तथ्यों को छिपाकर दोबारा एफआईआर दर्ज कराई गई और मामले को मारपीट तथा आपराधिक घटना का रूप दे दिया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह व्यावसायिक विवाद प्रतीत होता है, जिसे आपराधिक रंग देकर एफआईआर दर्ज कराई गई।