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Noida News: जीबीएम में हंगामें के दौरान फेेंकी कुर्सियां, एओए पर दस्तावेज न दिखाने का आरोप

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- एओए व निवासियों के बीच करीब आधे घंटे हुई कहासुनी, गाली-गलौज का भी आरोप
- निवासियों का आरोप, एजेंसी के चयन में की गई घोटाले बाजी
- एओए का कहना है कि निवासी कभी भी देख सकते हैं दस्तावेज

माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट स्थित आम्रपाली गोल्फ होम्स एवं किंग्सवुड सोसाइटी में रविवार को हुई जनरल बॉडी मीटिंग (जीबीएम) में जमकर हंगामा हुआ। जीबीएम में एडहॉक एओए व निवासी आमने सामने आ गए। निवासियों का आरोप है कि एओए के पदाधिकारियों ने निवासियों के साथ गलत व्यवहार किया। वहीं एओए की ओर से सारे आरोपों का खंडन किया गया है। हंगामे के दौरान लोगों ने कुर्सियां उठाकर फेंक दी।

निवासियों ने बताया कि जीबीएम के दौरान एओए से जब एजेंसी के चयन की प्रकिया के बारे में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने बातें बनाना शुरु कर दिया। उनका आरोप है कि हाल ही में पास किए गए एफएमएस टेंडर का पूरा विवरण लोगों को नहीं दिया जा रहा है। टेंडर में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्रति माह की एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जबकि कम रेट में अन्य एजेंसी काम करने को तैयार थी। उसके बाद भी 5806 फ्लैटों में रहने वाले निवासियों के पैसों को बर्बाद किया गया। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि निवासियों द्वारा पिछली जीबीएम में लिए गए निर्णयों और उनके अनुपालन की जानकारी मांगे जाने पर एओए पदाधिकारी कोई स्पष्ट जवाब देने में असफल रहे। लगभग चार महीने बाद बुलाई गई इस जीबीएम में निवासियों के कई गंभीर और महत्वपूर्ण सवाल थे, लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया गया। निवासियों के विरोध के बाद एओए के सभी सदस्य बिना किसी औपचारिक समापन या निर्णय के जीबीएम छोड़कर चले गए। इसके बाद जीबीएम में उपस्थित सभी निवासियों ने सर्वसम्मति से हस्ताक्षर कर एओए को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का प्रस्ताव पारित किया।
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निवासियों को चोर कहने पर भड़का गुस्सा
बैठक में मौजूद निवासियों का आरोप है कि एओए की ओर से आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें चोर कहा गया। इसके साथ ही कहा गया कि निवासी दस्तावेज लेकर भाग सकते हैं। इस बयान से वहां मौजूद निवासी भड़क गए। जिसके बाद काफी देर तक सोसाइटी में एओए के खिलाफ नारेबाजी की गई।


एफएमएस टेंडर की जांच की मांग
निवासियों ने एडहॉक एओए को सर्वसम्मति से विघटित कर दिया। निवासियों ने यह भी निर्णय लिया कि एडहॉक एओए द्वारा लिए गए सभी प्रमुख वित्तीय निर्णयों, विशेष रूप से एफएमएस टेंडर की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह प्रस्ताव शीघ्र ही कोर्ट रिसीवर एवं रजिस्ट्रार को आवश्यक कार्रवाई हेतु सौंपा जाएगा।
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क्या बोले अध्यक्ष
एडहॉक एओए अध्यक्ष राघवेंद्र यादव का कहना है कि सभी आरोप गलत है। जिस एजेंसी का चयन किया गया है, उसने सभी नियमों का पालन किया है। अन्य एजेंसियों की अपेक्षा काफी कम रुपये में वह बेहतर सुविधाएं देगा। एडहॉक एओए को विघटित करने का अधिकार केवल सीआर के पास है। यदि किसी भी निवासी को दस्तावेज देखने हैं तो वह सोमवार से देख सकता है।
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