नोएडा। सेक्टर-93ए सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट के ट्विन टावर को गिराने के लिए प्राधिकरण ने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) से कार्ययोजना मांगी थी। सीबीआरआई ने मामले में प्राधिकरण से समय मांगा है। सीबीआरआई ने 11 अक्तूबर को कार्ययोजना सौंपने का वादा किया है।
मंगलवार को सीबीआरआई और प्राधिकरण के अधिकारियों के बीच ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी, एसीईओ नेहा शर्मा, जीएम प्लानिंग इश्तियाक अहमद, जीएम सिविल पीके कौशिक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सीबीआरआई की ओर से उप निदेशक सुविर सिंह ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने अब तक के किए गए कार्यों से प्राधिकरण को अवगत कराया। उन्होंने इस काम को करने के लिए हामी भरी और एक एजेंसी के सहयोग से इसे गिराने को कहा। इस बाबत सोमवार को पूरी कार्ययोजना विस्तार से बताई जाएगी। इससे पहले मंगलवार को सीबीआरआई की टीम को प्राधिकरण में बुलाया गया था, लेकिन उनके निदेशक के मौजूद नहीं होने से से टीम नोएडा नहीं आ पाई। अब संभावना है कि अगली बैठक में टीम के सदस्य नोएडा पहुंचे।
खरीद योग्य एफएआर पर दी गई अनुमति कई पर पडे़गी भारी
सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट मामले में खरीद योग्य फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) पर दी गई अनुमति कई अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है। एसआईटी की रिपोर्ट में इस प्रक्रिया के दौरान गड़बड़झाले की ओर से इशारा किया गया है। ऐसे में प्राधिकरण के 24 में से कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
दरअसल, बिल्डर को ज्यादा निर्माण करने के लिए एफएआर खरीदना पड़ता है। इसमें नए और पुराने आवंटियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होती रही है। एमरॉल्ड कोर्ट मामले में बिल्डर को मिले खरीद योग्य एफएआर में कहां-कहां गड़बड़ हुई है यह विजिलेंस की जांच के केंद्र में होगा। अगर सही तरीके से इसकी जांच होती है तो इस मामले में कई बड़े अधिकारी मुसीबत में घिर सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि इसी मामले में कुछ अधिकारियों के खिलाफ घेरा कसा जा सकता है। इसके अलावा प्राधिकरण के लीगल सेल और फाइनेंस विभाग के अधिकारियों पर भी उंगली उठी है। इसमें फाइलों पर हस्ताक्षर के अलावा कोर्ट में प्राधिकरण का पक्ष रखने के दौरान हुई लापरवाही पर संज्ञान लेने की बात सामने आ रही है। हालांकि, अभी भी यह जांच का विषय है कि कौन-कौन से अधिकारी अंतिम तौर पर दोषी साबित होंगे। जांच के दौरान विजिलेंस की टीम अधिकारियों को पक्ष रखने का भी मौका देगी। संभव है कि अधिकारियों की ओर से कुछ नई जानकारी दी जाए। एसआईटी जांच में उन्हें यह मौका नहीं मिला था, लेकिन अब मौका देने की बात बताई जा रही है।
विजिलेंस की जांच के दौरान एक जांच अधिकारी नियुक्त होगा। हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि जांच विजिलेंस लखनऊ के हाथों में होगी या फिर मेरठ की टीम करेगी। एक-दो दिन में यह साफ हो जाएगा कि इसकी जांच प्रक्रिया किस तरह से आगे बढ़ेगी।