ग्रेटर नोएडा में कलाधाम सोसाइटी में बोरिंग खुदाई के लापरवाही भरे गड्ढे में डूबकर हुई एक मासूम की मौत के मामले में आरोपी ठेकेदार मनोज जैन की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोपी द्वारा कारित अपराध लापरवाही न होकर जानकारी आधारित अपराध की श्रेणी में आता प्रतीत होता है। इसलिए जमानत का आधार पर्याप्त नहीं है।
मामला नॉलेज पार्क-2 स्थित कलाधाम सोसाइटी के पार्किंग नंबर-1 से जुड़ा है। जहां 25 जुलाई की शाम वादी शिवम यादव का छह वर्षीय पुत्र अव्यान अपने साथी लवकुश के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह संबंधित प्राधिकरण द्वारा कराई जा रही बोरिंग खुदाई के लिए खोदे गए करीब 15 फुट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरा। घटना देखकर लवकुश मदद के लिए आसपास के लोगों को बुलाने दौड़ा। सूचना पाकर सोसाइटी में रहने वाले कलाकार हरमीत रतन ने साहस दिखाते हुए पानी से भरे गड्ढे में छलांग लगाई और बच्चे को बाहर निकाला। इसके बाद उसे तुरंत ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल की आपातकालीन विभाग ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
पीड़ित पिता ने प्राथमिकी में आरोप लगाया कि उनके पुत्र की मौत सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की घोर लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा नियमों की अनदेखी का सीधा परिणाम है। आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मनोज जैन ठेकेदार फर्म में साझेदार हैं। कार्यस्थल पर दो अधिकृत सुपरवाइजर नियुक्त किए गए थे। सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक निर्देश व उपकरण उपलब्ध कराए गए थे।
वहीं अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता रजनीश यादव व शिखर यादव ने तर्क दिया कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी द्वारा आरोपी की फर्म को सौंपे गए बोरवेल खुदाई कार्य में बिना किसी चेतावनी, बैरिकेडिंग या सुरक्षा मानकों के 10-12 फुट गहरा गड्ढा खुला छोड़ा गया, जो आवासीय कॉलोनी में स्थित होने के कारण बच्चों के खेलने की जगह भी था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी की फर्म ने आवासीय परिसर में रहने वाले लोगों, विशेषकर बच्चों की जान को उत्पन्न खतरे की जानबूझकर अनदेखी की। जिसके कारण मासूम की जान गई। इसे गंभीर प्रकृति का अपराध मानते हुए अदालत ने जमानत अर्जी निरस्त कर दी।