14 बिल्डरों के खिलाफ स्टांप एक्ट में दर्ज होगा मुकदमा
नोएडा। रियल एस्टेट डेवलपर्स ने निर्माण का दायरा बढ़ाने के लिए प्राधिकरणों से अनुमति ली। इसके बदले में पैसा भी चुकाया, लेकिन अनुमति के बाद दायरे से अधिक किए गए निर्माण के लिए रजिस्ट्री विभाग को न तो स्टांप शुल्क चुकाया और न ही रजिस्ट्री कराई। ऐसे में रजिस्ट्री विभाग को करीब 24 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। ऐसे 14 बिल्डरों के खिलाफ अब स्टांप एक्ट में मुकदमा दर्ज होगा। रजिस्ट्री विभाग ने इसकी फाइल जिलाधिकारी और शासन को भेज दी है। रजिस्ट्री विभाग मामले की कई माह से जांच कर रहा था। सबसे पहले प्राधिकरण से उन बिल्डरों की सूची मांगी गई, जिन्होंने निर्माण का दायरा बढ़ाने के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) खरीदा है। इसके बाद देखा गया कि इनमें से कितने बिल्डरों ने बढ़े निर्माण पर स्टांप शुल्क चुकाया। मामले में रजिस्ट्री विभाग की ओर से नोटिस भी भेजी गई थी, लेकिन इसका कोई परिणाम सामने नहीं आ पाया। इसी वजह से 14 बिल्डरों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए रजिस्ट्री विभाग कार्रवाई कर रहा है।
चार साल से भी ज्यादा पुराने हैं मामले
रजिस्ट्री विभाग का कहना है कि 6 मामले चार साल के भीतर के हैं। वहीं, आठ मामले चार साल से भी ज्यादा के हैं। बिल्डरों ने इतने वर्ष पहले एफएआर खरीदा और इमारतों को ऊंचा करते गए, लेकिन रजिस्ट्री नहीं कराई। चार साल के अंदर वाले मामलों में रजिस्ट्री विभाग की संस्तुति पर जिलाधिकारी की ओर से मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है। वहीं, इससे ज्यादा पुराने मामले में शासन की संस्तुति अनिवार्य है।
शासन का है आदेश
रजिस्ट्री विभाग के उच्चाधिकारियों ने बताया कि शासन का आदेश है कि अगर कोई बिल्डर एफएआर खरीदकर ज्यादा निर्माण करता है तो उसे बढ़े निर्माण की भी रजिस्ट्री कराना अनिवार्य है। इसके अलावा उसे स्टांप शुल्क भीचुकाना होगा, जो खरीदे गए एफएआर के कुल मूल्य का 5 प्रतिशत होगा।
यह होता है एफएआर
एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशियो के अंतर्गत नोएडा प्राधिकरण से जमीन का आवंटन होने के बाद यह पहले से तय होता है कि उसे कितने क्षेत्रफल में निर्माण करना है। हालांकि, प्राधिकरण से यह सुविधा मिली है कि किसी को अगर ज्यादा निर्माण करना है तो वह तय दर पर एफएआर खरीद सकता है। इसके बाद जितनी अनुमति मिली है, उस पर निर्माण करा सकता है।
जिलाधिकारी के पास भेजी गई बिल्डरों की सूची
जिलाधिकारी के छह बिल्डरों की सूची भेजकर बताया गया है कि उन्होंने कितना ज्यादा निर्माण किया है। रजिस्ट्री नहीं कराने और स्टांप शुल्क नहीं चुकाने की वजह से होने वाले नुकसान की भी जानकारी दी गई है। इसमें सेक्टर-75 के वैल्यूयेंट इंफ्रा डेवलपर्स प्रालि पर 16.31 लाख, सेक्टर-118 के आईवीआर प्राइम डेवलपर्स पर 8.25 करोड़, सेक्टर-168 के कैपिटल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्रालि पर 53.57 लाख, सेक्टर-75 के मैक्सविल कंसल्टेंट प्रालि पर 20.96 लाख, सेक्टर-75 के परफेक्ट मेगा पर 1.20 करोड़ और सेक्टर-120 के आरजी रेजीडेंसी पर 1.66 करोड़ का स्टांप शुल्क बन रहा है।
शासन को भेजी गई सूची
8 बिल्डरों की सूची शासन को भेजी गई है। इसमें सेक्टर-63 के आईवी काउंटी पर 2.84 करोड़, सेक्टर-78 के नेक्सजेन इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड पर 95.15 लाख, सेक्टर-119 के आईवीआरसीएल अनन्या प्रोजेक्ट पर 4.02 करोड़, सेक्टर-78 के महागुन रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड पर 1.01 करोड़, एक्सप्रेस बिल्डर एंड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड पर 70.73 लाख, सुपरटेक लिमिटेड पर 37.64 लाख, ई-हो स इंफ्रास्ट्रक्चर पर 95.43 लाख और एपेक्स ड्रिम पर 95.02 लाख का स्टांप शुल्क बन रहा है।