जिला उपभोक्ता आयोग
- आयोग ने मानसिक संताप के लिए 25 हजार और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने के दिए निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। क्रेडिट कार्ड से बैंक की गलती से निकली रकम वापस करने के बाद उस पर लगाए गए चार्ज की वसूली के लिए खातेदार को बार-बार फोन कर मानसिक रूप से परेशान करना आरबीएल बैंक को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए बैंक पर मानसिक संताप के लिए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा पांच हजार रुपये वाद व्यय के रूप में शिकायतकर्ता को देने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा ने की।
नोएडा के सेक्टर-62 निवासी केएम पांडेय ने आरबीएल बैंक से क्रेडिट कार्ड लिया था। सात सितंबर 2019 को उन्हें फोन आया कि उनके क्रेडिट कार्ड से 10 हजार रुपये की निकासी हुई है और उससे और रकम निकालने का प्रयास किया जा रहा है। फोन करने वाले ने बताया कि रकम हाथरस के चमन बाजार के पास निकाली गई है। पांडेय ने बैंक को बताया कि उन्होंने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर कोई रकम नहीं निकाली है। किसी अन्य व्यक्ति ने धोखाधड़ी कर यह रकम निकाली थी।
उन्होंने तत्काल बैंक को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद कर्मचारियों ने क्रेडिट कार्ड ब्लॉक कर दिया। साथ ही फेस-टू थाना, नोएडा में शिकायत दर्ज कराई गई। पांडेय के मुताबिक, बार-बार शिकायत करने के बाद बैंक ने 101 दिन बाद 16 दिसंबर 2019 को 13 हजार रुपये क्रेडिट कार्ड खाते में वापस जमा किए। हालांकि बैंक चार्ज, विलंब भुगतान शुल्क और ब्याज की रकम वापस नहीं की गई। इसके बाद इन चार्ज की वसूली के लिए बैंक की ओर से उन्हें बार-बार फोन किए गए, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हुए। उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
सुनवाई के दौरान बैंक ने कहा कि जांच में सामने आया था कि विवादित निकासी के बाद रकम निकालने के तीन और असफल प्रयास किए गए थे। हालांकि तब तक कार्ड ब्लॉक किया जा चुका था, इसलिए लेनदेन सफल नहीं हुए। बैंक ने जांच के बाद 16 दिसंबर 2019 को खाते में 13 हजार रुपये जमा कर दिए थे।
आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि बैंक ने निकाली गई रकम वापस कर दी, लेकिन बैंक चार्ज, विलंब भुगतान शुल्क और ब्याज से हुई क्षति की भरपाई करना भी उसकी जिम्मेदारी थी। बैंक इस राशि के भुगतान के लिए शिकायतकर्ता पर दबाव नहीं बना सकता था। आयोग ने बार-बार फोन कर परेशान करने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार पद्धति माना।
आयोग ने बैंक को भविष्य में इस तरह फोन कर शिकायतकर्ता को परेशान नहीं करने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक संताप के लिए 25 हजार और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने के निर्देश दिए।