नोएडा में सुबह 11 बजे सेक्टर- 60,58,54 तिराहे पर प्रदूषण का हाल।
हरियाली की जगह कंक्रीट के जंगल ने बढ़ाया नोएडा में प्रदूषण
नोएडा। शहर में प्रदूषण का स्तर अब भी लाल निशान से ऊपर (एक्यूआई 339) है। इसकी वजह पराली जलने से उठने वाले धुएं का वातावरण में स्थिर रहना है। लोगों का कहना है कि शहर में प्रदूषण बढ़ने का सबसे बड़ा कारण हरियाली की जगह कंक्रीट के जंगल होना है। वहीं, प्राधिकरण-प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। सवाल यह है कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर कम हो गया है। लेकिन, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कमी नहीं हो रही है। आरोप है कि जिले में कहीं भी पॉलिथीन या कूड़ा जलाया जा रहा है। वहीं, प्राधिकरण और प्रशासन कुछ नहीं कर पा रहा है। भविष्य में प्रदूषण जानलेवा स्तर तक न पहुंचे इसके लिए बड़े स्तर पर पौधरोपण किया जाना चाहिए। उधर, सेक्टर-115 में पांच हेक्टेयर जमीन पर 40 हजार पौधे लगाए गए हैं।
आसपास के प्रदेशों में पराली जलने का असर दिल्ली-एनसीआर में सर्वाधिक पड़ता है। औद्योगिक नगरी व बाहरी शहरों से आने वाले वाहनों की संख्या भी ज्यादा है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर सर्वाधिक रिकार्ड किया जाता है। इसका असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर दिख रहा है। सुबह सैर करने वाले लोगों की संख्या में कमी हुई है। वहीं, खुली हवा में सांस लेना तक दूभर होता दिख रहा है। इसकी एक वजह हरियाली की कमी होना भी है। हालांकि वन विभाग, प्राधिकरण व प्रशासन की ओर से लाखों पौधे लगाए गए हैं। लेकिन, इसका असर अभी नहीं वर्षों बाद दिखेगा। गौतमबुद्धनगर में करीब 33.3 प्रतिशत हरियाली होनी चाहिए। लेकिन, वर्तमान में सिर्फ 2.3 प्रतिशत के आसपास ही हरियाली है। ऐसे में हरियाली को बढ़ाने के लिए पौधरोपण करना होगा। ताकि भविष्य सुरक्षित किया जा सके। इसी कड़ी में सेक्टर-115 में 5 हेक्टेयर जमीन पर 27 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। यह पौधे प्रवासी पक्षियों के लिए आश्रय स्थल बन रहे हैं। पर्यावरणविद् पीपल बाबा ने बताया कि यहां 33.3 प्रतिशत हरियाली के लिए करोड़ों की संख्या में पौधे लगाने होंगे। लोगों को जागरूक करना होगा। कंक्रीट की इमारतों के निर्माण पर रोक लगानी होगी। ताकि प्रकृति को बचाया जा सके। गौतमबुद्ध नगर को हराभरा करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी ने पर्यावरणविद् पीपल बाबा को ही दी है।
रविवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स
शहर में औसत - 353
सेक्टर-62 - 371
सेक्टर-125 - 342
सेक्टर-1 - 368
सेक्टर-116 - 330