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अवैध कॉलोनी पर चला बुलडोजर, 50 करोड़ की जमीन कब्जा मुक्त

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दनकौर। यमुना प्राधिकरण की टीम ने बुधवार को पुलिस बल के साथ बाइपास रोड़ पर बुलडोजर चलाकर करीब 50 करोड़ रुपये की 35 बीघा जमीन कब्जा मुक्त करा ली। इस जमीन पर अवैध कॉलोनी काटी जा रही थी। कार्रवाई के दौरान किसानों और अधिकारियों के बीच नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया तो मामला शांत हुआ। हालांकि, किसानों के हाईकोर्ट में याचिका डालने से प्राधिकरण के अधिकारियों को बीच में ही कार्रवाई रोकनी पड़ी।
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अधिकारियों के अनुसार, कस्बे में बाइपास रोड़ पर कई जगह प्राधिकरण की अधिसूचित क्षेत्र की जमीन पर अवैध निर्माण कर कॉलोनी काटी जा रही है। भूमाफिया स्थानीय और अन्य जिलों के लोगों को एयरपोर्ट और फिल्म सिटी के नजदीक घर बनाने का सपना दिखाकर प्लॉट बेच रहे हैं। लोग अपनी जमा पूंजी अवैध कॉलोनी में लगाकर झांसे में आ रहे हैं, जबकि प्राधिकरण की ओर से लगातार चेतावनी दी जा रही है। दनकौर में दो अलग-अलग जगह करीब 30 बीघा और 5 बीघा जमीन पर अवैध निर्माण चल रहा था। बुधवार को प्राधिकरण की टीम ने जेसीबी की मदद से अवैध निर्माण को ध्वस्त का जमीन को कब्जा मुक्त कराया है।
इधर, कार्रवाई का कुछ किसानों और भूमाफिया ने विरोध किया। अधिकारियों के साथ कहासुनी भी हुई। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लेकर लोगों को शांत किया। इसके बाद पुलिस के कार्रवाई के खिलाफ किसानों ने कोतवाली का घेराव किया और हिरासत में लिए किसानों को रिहा करने की मांग की।
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किसान बोले- आबादी की है जमीन
किसान देशराज सिंह, होशियार सिंह व रिंटू चौधरी ने बताया कि उनकी जमीन पर प्लॉट नहीं काटे जा रहे हैं, बल्कि वह परिवार के साथ रहते हैं। सेटेलाइट सर्वे में भी आबादी दिखाई दे रही है। प्राधिकरण से मिले नोटिस का जवाब दिया गया है, लेकिन अधिकारियों की तानाशाही के कारण किसानों की बात नहीं सुनी जा रही। इसके खिलाफ अदालत की शरण ली जाएगी।
सूचना लीक होने पर सीईओ ने बैठाई जांच
ग्रेटर नोएडा। कॉलोनाइजर पर कार्रवाई करने के लिए प्राधिकरण कार्यालय से करीब 15 दिन पहले से योजना बनाई गई थी, लेकिन इस योजना को प्राधिकरण अधिकारी के कार्यालय से लीक कर दिया गया। जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी तो हाईकोर्ट से मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पास प्राधिकरण के वकील का फोन आया। उन्होंने कहा कि किसानों ने कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका डाल दी है। ऐसे में कार्रवाई रोकनी पड़ेगी। इस पर सीईओ ने तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकवाई। इस दौरान उन्होंने एक अधिकारी को फटकार लगाई और कहा कि गोपनीय सूचना कोर्ट और किसानों तक कैसे पहुंची। इस मामले की सीईओ ने जांच कराने को भी कहा है और एसीईओ मोनिका रानी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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