फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

10 हजार में खरीदी ऑक्सीजन, फिर भी टूट गई सांसों की डोर

विज्ञापन
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा। महामारी के दौर में व्यवस्थाओं की सांस फूल रही है। वहीं, आपदा में अवसर तलाशने वाले लोग कालाबाजारी कर पीड़ितों को लूटने में जुटे हैं। नोएडा के गेझा गांव की महिला को सोमवार शाम सांस लेने में दिक्कत हुई तो परिजन उसे गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन ऑक्सीजन और बेड न होने का हवाला देकर टरका दिया गया। इस पर परिजनों ने फेसबुक पर लाइव आकर मदद मांगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। बड़ी मुश्किल से गाजियाबाद-गुलावठी रोड स्थित अस्पताल में बेड मिला तो परिजन ऑक्सीजन की तलाश में जुट गए। गाजियाबाद एनएच-24 ऑटो खड़ा कर कालाबाजारी करने वालों ने बमुश्किल 150 रुपये में भरने वाले सिलिंडर में 10000 हजार रुपये में ऑक्सीजन दी। इसके बाद परिजन सुबह 6 बजे ऑक्सीजन लेकर अस्पताल पहुंचे, तब तक महिला के सांसों की डोर टूट चुकी थी।
विज्ञापन

गेझा गांव निवासी आदेश त्यागी ने बताया कि वह इंडिया स्पोर्ट्स संघ के जिलाध्यक्ष हैं। उनके भाई राजेश त्यागी फोटो स्टूडियो चलाते हैं। राजेश की पत्नी सीमा को दो दिन पहले बुखार और खांसी हुई थी। आदेश का कहना है कि बुखार और खांसी कम हो गई थी। सोमवार को आदेश एक भाई की सगाई से लौटे तो पता चला कि उनकी भाभी सीमा त्यागी को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। चिकित्सक से अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी है। इसके बाद वह उन्हें कार में लेकर यथार्थ अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां ऑक्सीजन और बेड न होने का हवाला दिया गया। परिजन ने कहा कि बेड नहीं है तो वह मरीज को गाड़ी में ही रखेंगे, किसी तरह से ऑक्सीजन की व्यवस्था करा दें, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। इसके बाद वह जेपी अस्पताल, गाजियाबाद के अस्पताल लेकर पहुंचे। दिल्ली के जीटीबी में भी संपर्क किया, तो पहले कोरोना रिपोर्ट मांगी फिर बेड व ऑक्सीजन न होने का हवाला देकर टरका दिया गया। मंगलवार रात करीब 10 बजे भी पीड़ित परिजनों ने फेसबुक पर लाइव आकर दर्द बयां किया।
ऑटो में रखकर हो रही थी कालाबाजारी
आदेश ने बताया कि गाजियाबाद-गुलावठी रोड स्थित एक अस्पताल ने उनकी भाभी को भर्ती तो कर लिया, लेकिन ऑक्सीजन की व्यवस्था करने के लिए उन्हें भेज दिया। एनएच-24 पर उन्हें एक ऑटो दिखा, जिसमें ऑक्सीजन के सिलिंडर रखकर कालाबाजारी हो रही थी। मशक्कत और सौदेबाजी के बाद उन्हें 150 रुपये की ऑक्सीजन 10 हजार रुपये में दी गई।
विज्ञापन

इंदिरापुरम गुरुद्वारे ने की मदद
आदेश ने बताया कि उन्हें पता चला कि इंदिरापुरम के गुरुद्वारे में ऑक्सीजन का बंदोबस्त किया गया है। वहां पहुंचे तो बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों को राहत देने के लिए पाइप से ऑक्सीजन की व्यवस्था की जा रही थी। उनकी भाभी को यहां मदद मिली और ऑक्सीजन लेवल बढ़ने के बाद ही वह अन्य अस्पताल की तलाश में निकले थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें