प्रतिबंधित पटाखे मंगाने और बेचने वालों को होगी जेल
नोएडा। जिले में बारूद और तेज आवाज के पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश बाद पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। इसके बावजूद भी दिल्ली और गाजियाबाद से प्रतिबंधित पटाखों को मंगाया जा रहा है। लेकिन, अब जिला प्रशासन ने प्रतिबंधित पटाखे मंगाने, बेचने और सप्लाई करने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजने के लिए पुलिस को हरी झंडी दे दी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराना पुलिस-प्रशासन की जिम्मेदारी है और जो इसका उल्लंघन करेंगे। उनकी शांतिभंग और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने के आरोप में गिरफ्तारी की जाएगी। जिला प्रशासन की एक टीम कोंडली और दूसरी टीम गाजियाबाद से सटी सीमा पर तैनात है और ऐसे लोगों की तलाश में जुटी है। अधिकारिक सूत्रों का दावा है कि कोंडली मार्केट में बड़े स्तर पर पटाखे रखे गए हैं। वहीं, गाजियाबाद के फरुखनगर में आतिशबाजी का बड़ा काम है। इन दोनों जगहों से दुकानदारों को लोग फोन कर कपडे़ और अन्य सामान की पैकिंग में पटाखे सप्लाई कर रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार मिश्र ने इस तरह की सूचनाएं मिलने की पुष्टि की है। वहीं, प्रतिबंधित पटाखे मंगाने, बेचने और सप्लाई करने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजने के निर्देश दिए हैं।
ग्रीन पटाखों को लेकर पशोपेश में दुकानदार
ग्रीन पटाखे को लेकर दुकानदार पसोपेश में हैं। स्थिति स्पष्ट करने के लिए अधिकारियों के पास जाकर पटाखों को पहचानने और लाइसेंस संबंधी कई सवाल पूछ रहे हैं। इस अधिकारियों ने बताया है कि जितने भी प्रकार के पटाखे होंगे, उनका अलग-अलग बार कोड होगा। क्यूआर कोड से स्कैन कर यह पता लगाया जा सकता है कि पटाखा ग्रीन है या फिर प्रतिबंधित। इसके बाद भी दुकानदारों में असमंजस की स्थिति है।
बारूद वाले पटाखे से होता था अधिक प्रदूषण
2017 की दिवाली तक बाजार में बारूद के पटाखों की जमकर बिक्री होती थी। लेकिन, 23 अक्तूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बारूद वाले पटाखों पर रोक लगा दी गई। अधिकारी बताते हैं कि इस तरह के पटाखों में बेरियम के कण होते हैं। इससे पटाखे फटने के दौरान रंग बिरंगे दिखाते हैं। वहीं, एल्युमीनियम से चमकीला पदार्थ दिखाई देता है। जबकि चारकोल से धुआं और प्रदूषण बढ़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इन तीनों कणों वाले पटाखों पर पाबंदी लगा दी है। बताया जा रहा है कि ग्रीन पटाखों में इस तरह के कणों की मात्रा बहुत कम है। इससे प्रदूषण नाममात्र का ही होगा। वहीं, भविष्य में इसे पूरी तरह वातावरण के अनुकूल बनाया जाएगा।
संगठनों से की सहयोग की अपील
दिवाली पर पटाखे जलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट शैलेंद्र कुमार मिश्र ने सभी थाना प्रभारियों और सेक्टरों की आरडब्ल्यूए व सोसायटियों की एओए को नोटिस भेजकर निर्देश दिए हैं। इसके अलावा अलग-अलग सेक्टरों में जाकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी लोगों से दिवाली पर बारूद वाले पटाखे न खरीदने और चलाने की अपील कर रहे हैं। फोनरवा, आरडब्ल्यूए और शहर की सामाजिक संस्थाओं के साथ बैठक कर अपील की जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराने में सहयोग करें।
रात 8 से 10 बजे तक चला सकेंगे पटाखे
सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि दिवाली पर रात 8 से 10 बजे तक ही लोग ग्रीन पटाखे चला सकेंगे। इसके लिए भी सेक्टर या शहर में कोई एक स्थान चिह्नित किया जाएगा। जहां जाकर लोग एक साथ इन पटाखों को चला सकेंगे। सिटी मजिस्ट्रेट शैलेंद्र मिश्रा ने फोनरवा, आरडब्ल्यूए, सामाजिक संस्थाओं और एनजीओ आदि के पदाधिकारियों से अपील की है कि वह लोगों को जागरूक करें कि कम से कम पटाखे चलाएं और निर्धारित समय की जानकारी भी दें।
एनजीटी के निर्देशों का नहीं हो रहा पालन
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ता देख नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सचेत हो गए हैं। लेकिन, परिवहन विभाग की ओर से प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। मौजूदा समय में जिलेभर में करीब 52 हजार वाहन ऐसे हैं, जो 10 और 15 साल की समय सीमा पार कर चुके हैं और वह शहर की सड़कों पर धुआं उड़ाते घूम रहे हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश है कि दिल्ली-एनसीआर में 15 साल के पेट्रोल और 10 साल की अवधि पूरी कर चुके डीजल चलित वाहनों को न चलने दिया जाए।