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Noida News: वेव समूह की जमीन पर बोर्ड से नहीं हुआ फैसला, शासन के आदेश का इंतजार

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वेव समूह की जमीन पर बोर्ड से नहीं हुआ फैसला, शासन के आदेश का इंतजार
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-गुरुवार को नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड में गया था प्रस्ताव, वहां बताया गया कि शासन से आएगा आदेश

माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। वेव बिल्डर समूह की सेक्टर-32 और 25 ए में करीब 1 लाख वर्ग मीटर जमीन दोबारा दिए जाने की मांग पर नोएडा प्राधिकरण की गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में फैसला नहीं हो पाया। बोर्ड में गए प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्राधिकरण की तरफ से यह बताया गया कि प्रकरण शासन को संदर्भित किया गया है। शासन स्तर पर निर्णय होना है जिसे माना जाएगा। इसके बाद बोर्ड ने यह कहा कि यहां पर वेव समूह के दावे का निस्तारण कर अगर उसकी कुछ जमीन छूटती है तो उसे छोड़ा जाए। फिर सरेंडर डीड तैयार कर बाकी जमीन पर प्राधिकरण अपने प्लाट की योजना लाए। यहां का भू-उपयोग वाणिज्यिक है।



नोएडा प्राधिकरण ने 11 मार्च 2011 को वेव मेगा सिटी सेंटर प्राइवेट लिमिटेड को सेक्टर-25ए और 32 में 6.18 लाख वर्ग मीटर से अधिक जमीन आवंटित की थी। 2 सितंबर 2011 को इस प्लॉट की रजिस्ट्री हुई थी। जमीन का बकाया नहीं मिलने, परिेयोजना पूरी नहीं होने व अन्य वजह से फंसी परियोजनाओं में जमीन का कुछ हिस्सा सरेंडर करने के लिए 15 दिसंबर 2016 को प्रोजेक्ट सेटलमेंट पॉलिसी आई थी। वेव बिल्डर पर नोएडा प्राधिकरण का काफी बकाया हो गया था। बकाया जमा नहीं कर पाने की स्थिति में वेव बिल्डर ने 10 जनवरी 2017 को इस स्कीम के तहत जमीन का कुछ हिस्सा सरेंडर करने के लिए प्राधिकरण में आवेदन किया था। प्राधिकरण ने आवेदन स्वीकार करते हुए प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया। बिल्डर ने 1.64 लाख वर्ग मीटर से अधिक जमीन सरेंडर कर दी थी। उस समय तक बिल्डर की तरफ से प्राधिकरण में 1469.74 करोड़ रुपये जमा कर दिए थे। इसके बाद बिल्डर के प्राधिकरण पर 603.49 करोड़ रुपये बकाया रह गए थे।
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प्राधिकरण ने वर्ष 2021 में 1.08 लाख वर्ग मीटर जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया। प्राधिकरण की इस कार्रवाई के खिलाफ बिल्डर ने शासन में अपील की। तर्क दिया कि प्राधिकरण ने उसकी बकाया राशि को समायोजित किए बिना कार्रवाई कर दी। शासन ने बिल्डर का पक्ष सुनने के बाद कुछ महीने पहले जमीन का आवंटन बहाल करने के लिए कहा था। नोएडा प्राधिकरण ने अक्टूबर में हुई बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को रखा। बैठक में नए सिरे से बकाए की गणना करने और शासन को प्रकरण संदर्भित करने का निर्णय लिया गया था।
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