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दृष्टिहीन हैं दंपती...बच्चों को नहीं मिल रहा दाखिला

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दृष्टिहीन दंपती अपने बच्चों के साथ।
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नोएडा ( ओम सेठी)। सरकार ने प्रत्येक बच्चे को शिक्षा जरूरी कर दी है लेकिन कुछ स्कूल सरकार के इस आदेश को दर किनार करते हुए बच्चों को पढ़ने और आगे बढ़ने से रोकने का काम कर रहे हैं। इससे जाहिर होता है कि शासन-प्रशासन जनता के अधिकारों के लिए कितना गंभीर है। सेक्टर-22 की झुग्गियों में 3 हजार रुपये के किराये पर रह रहे दृष्टिहीन दंपती नेहा देवी और रामकेश अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इनके दो बच्चे हैं मंदीप और साहिल। एक की उम्र सात तो दूसरे की नौ वर्ष है।
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नेहा ने बताया कि उनके पति एक निजी कंपनी में काम किया करते थे। पहले लॉकडाउन में उनकी नौकरी चली गई और परिवार कई दिनों तक भूखा रहा। अब दोनों सेक्टर-21ए नोएडा स्टेडियम के पास नमकीन-टॉफी बेचते हैं और रोजाना 40-50 रुपये कमा लेते हैं। सेशन 2018-19 में साहिल का सेक्टर-24 स्थित केंद्रीय विद्यालय में दाखिले के लिए फॉर्म जमा किया था। उसकी सूची में नाम भी आया था। दाखिला प्रक्रिया के लिए जब दंपती विद्यालय पहुंचे तो वहां पर तत्कालीन अधिकारियों ने उनके बच्चों को यह कहते हुए दाखिला देने से मना कर दिया कि दृष्टिहीन के बच्चों का दाखिला नहीं हो सकता। सहायता के लिए नेहा सांसद, विधायक, तत्कालीन जिलाधिकारी समेत कई अधिकारियों के पास गईं। लेकिन किसी भी नेता व अधिकारी ने उनके सामान्य बच्चे को दाखिला दिलवाने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने ने कहा कि एक नेता ने तो उनसे यह भी कहा था कि अंधे हो तो बच्चे पैदा कैसे किए। संवाद
शिक्षिका की बात चुभी तो खुद पढ़ाई करने लगीं
शिक्षिका की यह बात उन्हें काफी चुभी और खुद पढ़ाई करने लगीं। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद से उन्होंने 2018-19 सत्र में दसवीं कक्षा का फॉर्म भरा। अब नेहा बारहवीं कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं। नेहा 17 साल की उम्र में दृष्टिहीन हो गई थीं। नेहा ने बताया कि उनके जीवन का एक ही लक्ष्य है कि बच्चे पढ़ लिख जाएं ताकि यह न कहें कि खुद तो नेत्रहीन हो हमारी जिंदगी भी खराब कर दी। वह अपने बच्चों का किसी भी विद्यालय में दाखिला चाहती हैं। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को शिक्षा नहीं मिली तो वह गलत संगत में पड़ सकते हैं।
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अभी बच्चे एक संस्था में कर रहे हैं पढ़ाई
साहिल और मंदीप दोनों ही इस समय चैलेंजर्स की पाठशाला नामक संस्था में शिक्षा हासिल कर रहे हैं। यह संस्था गरीब बच्चों को पढ़ाती है और उन्हें इस काबिल बनाती है कि किसी भी स्कूल में दाखिला मिल जाए। चैलेंजर्स ग्रुप के संस्थापक प्रिंस ने बताया कि इतनी कठिनाइयों के बावजूद नेहा किसी के आगे सहायता के लिए हाथ नहीं फैलाती हैं। बल्कि मेहनत करके बच्चों को लालन-पालन कर रही हैं। केंद्रीय विद्यालय वाला प्रकरण होने के बाद उनके साथ एक घटना हो गई। नेहा छत से नीचे गिर गईं थी और छह माह तक बेड रेस्ट पर रहीं।
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कोई भी स्कूल इसलिए दाखिला देने से इनकार नहीं कर सकता कि बच्चे के माता-पिता दृष्टिहीन हैं। इस मामले में पीड़ित परिवार की सहायता की जाएगी और उन्हें नजदीक के सरकारी विद्यालय में निशुल्क दाखिला दिलाया जाएगा।
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डॉ. धर्मवीर सिंह जिला विद्यालय निरीक्षक
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