सचदेवा बोले- मुख्यमंत्री ने विकास की जगह भ्रष्टाचार और घोटालों की राजधानी बना दिया
बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य मंत्री नहीं, दिल्ली को दो घोटालों के मास्टरमाइंड मंत्री मिले : भाजपा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विकास के मुद्दे पर भाजपा ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार को कठघरे में खड़ाकर आठ साल के कामकाज पर भी कई सवाल उठाए हैं। प्रदेश भाजपा कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आठ साल से दिल्ली का विकास ठप है। दिल्ली को भ्रष्टाचार और घोटाले की राजधानी बना दिया गया है। शराब माफिया करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। फ्री वाईफाई बंद हो चुका है। मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टरों और बाकी स्टाफ को वेतन नहीं मिल रहा। डीटीसी में मार्शल नहीं हैं। बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिल रही और तीर्थ यात्रा योजना भी कई माह से बंद है।
सचदेवा ने कहा कि मुख्यमंत्री दावा करते हैं कि उन्होंने देश के सर्वोत्तम स्वास्थ्य व शिक्षा मंत्री दिए। सच यह है कि उन्होंने देश को दो घोटालों के मास्टरमाइंड मंत्री दिए जो अब जेल में हैं। मुख्यमंत्री बताएं कि जब घोटाला नहीं हुआ तो शराब नीति क्यों वापस ली। काली सूची वाली कंपनियों को टेंडर क्यों दिया गया। दिल्लीवाले अभी तक नहीं समझ सके कि किस विकास की बात मुख्यमंत्री करते हैं। कोविड काल में जब दिल्ली सरकार ने बिना आश्रय लोगों को छोड़ दिया था तो दिल्ली के 70 लाख गरीबों को राशन देने वाले प्रधानमंत्री थे। केंद्र सरकार के विकास कार्यों को हटा दिया जाए तो दिल्ली में विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। इसी तरह शिक्षा का भी हाल यह है कि केंद्र सरकार ने आठ साल में दिल्ली के लिए दस नए केन्द्रीय व नवोदय विद्यालय स्वीकृत किए हैं। शिक्षा क्रांति की बात करने वाली दिल्ली सरकार के स्कूल में साइंस और कॉमर्स पढ़ाने की व्यवस्था तक नहीं है। खेल विश्वविद्यालय हो या सैन्य शिक्षा विद्यालय सब छलावा बनकर रह गए हैं।
घोटालों से दिल्ली को लूटा : बिधूड़ी
नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि केजरीवाल विकास की बात कर रहे हैं, हकीकत यह है कि दिल्ली सरकार ने क्लासरूम घोटाला, डीटीसी घोटाला, बिजली सब्सिडी घोटाला और जलबोर्ड में लगभग 58,000 करोड़ रुपये का घोटाला कर दिल्ली को सिर्फ लूटने का काम किया है। स्वास्थ्य की बड़ी-बड़ी बात करने वाली केजरीवाल सरकार ने सात अस्थायी अस्पताल बनाने में घोटाला किया है जिसकी जांच चल रही है। एक भी बस नहीं खरीदी गई। 1000 मोहल्ला क्लिनिक की जगह महज 350 मोहल्ला क्लिनिक ही खोल पाई जिसमें दवा और बेसिक सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। यमुना सफाई के लिए 2500 करोड़ रुपये केंद्र ने दिए। इसका कोई हिसाब नहीं है।