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Noida News: बिसहाड़ा कांड में मुकदमा वापस लेने की तैयारी

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(अदालत से)
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(नोटः खबर को ऑनलाइन नहीं चलाएं)
- अभियोजन ने सामाजिक सद्भाव की बहाली को देखते हुए मुकदमा वापस लेने का आदेश पारित करने की अनुमति मांगी
मोहम्मद बिलाल
ग्रेटर नोएडा। अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय प्रथम में विचाराधीन साल-2015 के चर्चित बिसहाड़ा कांड मामले में सरकार की ओर से मुकदमा वापस की अर्जी लगाई है। शासन व संयुक्त निदेश अभियोजन के आदेश के बाद सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) द्वारा अदालत में प्रार्थना पत्र दिया है। जिसमें सामाजिक सद्भाव की बहाली को देखते हुए मुकदमा वापस लेने का आदेश पारित करने की अनुमति मांगी है।
28 सितंबर 2015 की रात को थाना जारचा क्षेत्र के गांव बिसहाड़ा में गोमांस के सेवन की अफवाह फैलने के बाद भीड़ ने एक घर पर हमला कर दिया था। इस दौरान गांव निवासी अखलाक की हत्या कर दी गई थी। मामले में अखलाख की पत्नी इकरामन ने दस लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना में चश्मदीद गवाहों पत्नी इकरामन, मां असगरी, पुत्री शाहिस्ता और पुत्र दानिश के बयान दर्ज हुए थे। शुरुआती बयानों में 10 आरोपियों का नाम आया था, लेकिन बाद के बयानों में गवाहों ने अन्य 16 नाम और जोड़े। विवेचक ने 22 दिसंबर 2015 को 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। अभी सभी आरोपी जमानत पर रिहा हैं।
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फॉरेंसिक रिपोर्ट में गाय का मांस मिला पर बयान असंगत : विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से मांस के टुकड़े बरामद कर मथुरा की फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजे थे। 30 मार्च 2017 को आई रिपोर्ट में मांस गोवंशीय (गाय का मांस) पाया गया था। न्यायालय में दिए पत्र के मुताबिक चश्मदीद गवाह असगरी इकरामन, शाहिस्ता, दानिश के बयानों में आरोपियों की संख्या में बदलाव है। वादी व आरोपी सभी एक ही गांव के निवासी हैं। उसी गांव का निवासी होने के बाद भी वादी और अन्य गवाहों ने अपने बयानों में आरोपियों की संख्या में बदलाव किया है। दोनों पक्षों के बीच पहले से कोई रंजिश या शत्रुता रही हो। भारतीय नागरिक होने के कारण सभी को भारतीय संविधान का संरक्षण प्राप्त है। इसलिए सामाजिक सद्भाव की बहाली की के लिए मुकदमा वापस लिए जाने का आदेश पारित किया जाए।
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-शासन से मिले आदेश के बाद संयुक्त निदेशक अभियोजन ने लिखा था पत्र
उत्तर प्रदेश शासन के न्याय अनुभाग-5 (फौजदारी) लखनऊ द्वारा 26 अगस्त 2025 को जारी शासनादेश के अनुसार यह मुकदमा वापस लेने का निर्णय हुआ था। संयुक्त निदेशक अभियोजन गौतमबुद्धनगर ने 12 सितंबर 2025 को पत्र जारी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गौतमबुद्धनगर को इस संबंध में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। पत्र में कहा गया था कि राज्यपाल महोदया द्वारा अभियोजन वापसी की अनुमति दी गई है। यह कार्रवाई दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-321 के तहत की गई है।
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