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बाइक बोट : रिश्तेदारों से संबंध बिगड़े, फौजी को घर तक छोड़ना पड़ा

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ग्रेटर नोएडा। बाइक बोट फर्जीवाड़े में रुपये फंसाकर आर्थिक संकट और पारिवारिक संबंध खराब कर चुके निवेशक दिन प्रतिदिन अपना दर्द बयां कर रहे हैं। मेरठ के गोतका गांव निवासी सेवानिवृत्त फौजी सुभाष पवार ने न केवल ढाई लाख रुपये कंपनी में लगा दिए, बल्कि आरोपियों के झांसे में आकर रिश्तेदारों के पैसे भी निवेश करवा दिए। उनके और करीबियों के सात करोड़ रुपये कंपनी में फंस चुके हैं। आरोपियों की संपत्ति जब्त कर रुपये वापस मिलने की आस में वह घर छोड़कर कई माह से कोट गांव स्थित बाइक बोट के मुख्य दफ्तर पर धरना दे रहे हैं।
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सुभाष ने बताया कि वह नजफगढ़ के श्याम विहार में परिवार समेत रहकर सुरक्षाकर्मी की नौकरी कर रहे थे। जनवरी 2018 में अपने मामा के बेटे के कहने में आकर ढाई लाख रुपये गर्वित इनोवेटिव प्राइवेट लिमिटेड बाइक बोट कंपनी में लगा दिए। इसके बाद कुछ महीने तक किस्त मिलीं। इससे उन्हें कंपनी में भरोसा हो गया। इसकी चर्चा उन्होंने नवंबर 2018 में दो बेटियों के विवाह के दौरान रिश्तेदारों, करीबियों व अन्य फौजियों से भी की। उनकी बात पर वह भी विश्वास करने लगे और करीब सौ लोगों के सात करोड़ रुपये कंपनी में लगवा दिए। सुभाष ने बताया कि इनमें अधिकांश रुपये उन्होंने नवंबर 2018 में लगवाए थे। उस समय संजय भाटी व उसके साथियों ने कहा था कि पुरानी स्कीम केवल दिसंबर तक चलेगी। इसके बाद निवेश की रकम बढ़ा दी जाएगी और मुनाफा कम कर दिया जाएगा। अधिक निवेश करने पर आल्टो आदि देने का भी वादा किया गया था।
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शर्म और तकादे के चलते छोड़ना पड़ा घर
सुभाष का कहना है कि नवंबर के बाद उन्हें एक भी किश्त कंपनी ने नहीं दी। करीबी और रिश्तेदार उनसे रुपये दिलाने की मांग करते थे। नवविवाहित बेटी के ससुराल वालों से उनके काफी संबंध खराब हुए। इससे बेटियों को भी परेशानी उठानी पड़ी। करीबियों के तकादे और शर्म के कारण वह मेरठ और दिल्ली अपने घर भी नहीं जाते। वह कोट गांव में आठ माह से अन्य निवेशकों के साथ न्याय और रुपये वापसी की आस में नियमित धरना दे रहे हैं।
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