सीबीआई, आयकर और ईडी की नजर
आयकर विभाग के शिकंजे के बाद बसपा उपाध्यक्ष आनंद कुमार अब दूसरी केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर भी आ सकते हैं। इनमें सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की भी नजर है। आनंद कुमार व इनके करीबियों की बेनामी संपत्तियों के बारे में हर पहलू पर जांच की जा रही है। आयकर विभाग के शिकंजे के बाद आनंद कुमार के करीबी भूमिगत हो चुके हैं।
क्या था बाइक बोट फ्रॉड
गर्वित इन्नोवेटर्स लिमिटेड कंपनी की तरफ से बाइक बोट स्कीम लांच की गई थी। जो ओला उबर की तर्ज पर बाइक टैक्सी चलाने के नाम पर शुरू की गई थी। इसमें 62,100 रुपये के निवेश करने पर एक वर्ष तक 6765 रुपये प्रतिमाह देने की बात कही गई थी। निवेशकों के हजारों करोड़ पैसे लेकर कंपनी भाग गई। बाद में पुलिस के दबाव में संजय भाटी ने कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। पुलिस ने रिमांड पर लेकर संजय भाटी से पूछताछ की थी।
आनंद के दो करीबी अधिकारी पहले भी जा चुके हैं जेल
आनंद कुमार के दो करीबी अधिकारी पहले ही जेल जा चुके हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह टेंडर घोटाले व आय से अधिक संपत्ति के आरोपी हैं और जेल में हैं। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है। वहीं, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता को भी आनंद का करीबी बताया जाता था। पीसी गुप्ता के खिलाफ भी जमीन आवंटन घोटाला का मुकदमा दर्ज है और जेल में हैं। यादव सिंह व पीसी गुप्ता की एक वक्त नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में तूती बोलती थी। प्रदेश में बसपा सरकार के दौरान दोनों अधिकारी आनंद कुमार के इशारे पर भी काम करते थे