2007 में कथित विक्रेता की मौत, 2024 में तैयार किया सेल डीड
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने बैंक धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। आरोपी मोहम्मद वसी और शमशाद आलम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर एचडीएफसी बैंक से करीब 4 करोड़ 80 लाख रुपये का लोन पास कराने का आरोप है। अदालत ने मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए जमानत देने से इन्कार कर दिया।
धोखाधड़ी का मामला थाना सेक्टर-58 नोएडा में दर्ज है। एचडीएफसी बैंक के क्रेडिट इंटेलिजेंस एंड कंट्रोल विभाग में कार्यरत शिकायतकर्ता सोनल अरोरा ने छह दिसंबर 2025 को एफआईआर कराई थी। उन्होंने बताया था कि सनाउल्लाह अंसारी ने सेक्टर-128 स्थित एक प्रॉपर्टी के नाम पर करीब 5.10 करोड़ रुपये का लोन आवेदन किया था, लेकिन बाद में विवेक विहार दिल्ली स्थित एक अन्य संपत्ति के नाम पर लोन प्रक्रिया पूरी कराई। उसने जिस संपत्ति के दस्तावेज बैंक में जमा किए गए थे, उसमें कई गंभीर विसंगतियां थीं।
कथित विक्रेता रतना वासुदेवा के हस्ताक्षर और फोटो मूल दस्तावेजों से मेल नहीं खाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि रतना वासुदेवा की मौत 2007 में ही हो चुकी थी, जबकि उनके नाम से 2024 में सेल डीड तैयार की गई थी। जाली कागजात तैयार कर बैंक से 4.80 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया। मामले में कई अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं, जो विभिन्न राज्यों के हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने आरोपियों को फंसाए जाने की दलील दी।