8.5% ब्याज के मसले पर फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा ग्रेनो प्राधिकरण
ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण ने बुधवार शाम बोर्ड बैठक में बिल्डरों से 8.5 फीसदी ब्याज दर लेने के मसले पर फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने और अपनी खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए आदेश में बदलाव की अपील करने का निर्णय लिया है। 19 सितंबर से पहले ही प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेगा।
ऑनलाइन बोर्ड बैठक की अध्यक्षता चेयरमैन आलोक टंडन ने की। बैठक में मुख्य मुद्दे बिल्डरों से 8.5 फीसदी ब्याज दर लेने के मसले पर चर्चा हुई। इसमें बोर्ड के सभी सदस्यों में सहमति बनी कि सुप्रीम कोर्ट में फिर से याचिका दायर कर बताया जाए कि अगर 2010 से 8.5 फीसदी ब्याज दर लागू की गई तो प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो जाएगी। इसकी एक रिपोर्ट भी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसमें बताया गया कि प्राधिकरण के अंतर्गत 132 बिल्डरों के प्रोजेक्ट अधूरे हैं। इन पर लगभग 9000 करोड़ रुपये बकाया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व के अपने आदेश में सभी अधूरे प्रोजेक्ट के बिल्डरों को लाभ देने का आदेश दे रखा है। ऐसे में प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति बहुत खराब हो जाएगी। बोर्ड के समक्ष प्राधिकरण पर लदे कर्ज का भी जिक्र किया गया।
कोर्ट को बताया जाएगा कि प्राधिकरण पर इस समय करीब 6300 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके अलावा औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्राधिकरण करीब दो हजार करोड़ रुपये की जमीन किसानों से खरीद रहा है। उसके लिए भी फंड की दरकार है। प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क भी रख सकता है कि आम्रपाली के ही अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एसबीआई की तरफ से 12 फीसदी ब्याजदर पर ऋण स्वीकृत हुआ है। ऐसे में बिल्डरों से सिर्फ 8.5 फीसदी ब्याजदर 2010 से लेना उचित नहीं होगा। बता दें कि दो माह पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा व ग्रेनो प्राधिकरण को आदेश दिया है कि वे बिल्डरों से बकाया रकम पर 2010 से एसबीआई के बेस रेट 8.5 फीसदी के हिसाब से ही ब्याज दर लें, जबकि प्राधिकरण 11 से 12 फीसदी ब्याज ले रहा है।
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फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी अपील करेगा
प्राधिकरण कोर्ट से बिल्डरों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की अपील करेगा। प्राधिकरण ने पूर्व में क्यूरी एंड ब्राउन से प्राप्त ऑडिट रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कहा कि कई बिल्डरों ने खरीदारों से मिले पैसे को डायवर्ट किया है। फॉरेंसिक ऑडिट से साफ होगा कि किस बिल्डर ने प्रोजेक्ट में कितना पैसा लगाया और उसे खरीदारों से कितना पैसा मिला। बिल्डर ने प्राधिकरण की बकाया किस्तों का भुगतान क्यों नहीं किया। प्राधिकरण का यह भी तर्क है कि 2010 में बिल्डरों को 10,000 से 11,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर में जमीन आवंटित की गई जिसका कम से कम रेट अब 28,230 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो चुका है। प्राधिकरण कोर्ट के समक्ष एकमुश्त समाधान योजना का प्रस्ताव रख सकता है।
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कर्मचारी ऑउटसोर्स करने की तैयारी
प्राधिकरण बोर्ड ने स्टाफ की कमी को देखते हुए कर्मचारियों को आउटसोर्स करने की अनुमति दी है। प्राधिकरण में 378 पदों स्वीकृत हैं, लेकिन 253 कर्मचारी ही मौजूदा समय में कार्यरत हैं। इन रिक्त पदों पर ऑउटसोर्सिंग से भर्ती होगी। इसके लिए दो एजेंसियों के नाम भी चयनित किए गए हैं।