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प्राधिकरण ने अजनारा के सेल्स ऑफिस पर किया कब्जा

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ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-22ए स्थित अजनारा बिल्डर का प्लॉट आवंटन रद्द होने के बावजूद चल रहे सेल्स ऑफिस को प्राधिकरण ने शुक्रवार को बंद करा दिया। अब प्राधिकरण फॉरेंसिक ऑडिट कराने के लिए एजेंसी की तलाश में जुट गया है। पहले यह देखा जाएगा कि बिल्डर ने खरीदारों का पैसा दूसरी जगह तो नहीं लगाया है। यदि ऐसा हुआ तो प्राधिकरण अधिकारी बिल्डर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराएंगे। हालांकि, बिल्डर की ओर से प्राधिकरण के समक्ष आवंटन को बहाल करने की गुहार लगाई गई है।
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यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि अमर उजाला में छपी खबर से अजनारा बिल्डर के सेल्स ऑफिस से फ्लैट बेचे जाने की जानकारी मिली थी। इस पर अधिकारियों को मौके पर भेजा गया और तत्काल बिल्डर के सेल्स ऑफिस पर कब्जा कर लिया गया। अब बिल्डर का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा। यदि बिल्डर ने खरीदारों का पैसा किसी दूसरी जगह पर लगाया है तो रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। ऑडिट से साफ हो जाएगा कि कुल कितने फ्लैट बने हुए हैं और कितने अधूरे हैं, किन-किन खरीदारों से कितने पैसे लिए गए हैं, बिल्डर के पैसे से पेनोरमा प्रोजेक्ट पूरा हो सकेगा या नहीं। इसके अलावा खरीदारों को जो सुविधाएं देनी हैं उन पर कितना खर्च होगा। इससे खरीदारों का अहित होने से रोका जा सकेगा।
बिल्डर ने लगाई आवंटन बहाल करने की मांग
यमुना प्राधिकरण के समक्ष अजनारा बिल्डर ने बृहस्पतिवार को एक आवेदन पत्र देकर गुहार लगाई है कि उसके आवंटन को बहाल कर दिया जाए। वह कुल कीमत की 25 फीसदी राशि अभी जमा करने को तैयार है, जबकि बाकी राशि को 6 माह में जमा करा देगा। बिल्डर ने कहा कि प्राधिकरण की ओर से किए गए पत्राचार की जानकारी उसे नहीं हो पाई थी। साल-2020 में प्राधिकरण का पत्र आया था। उस समय कोरोना संक्रमण अधिक था और फ्लैट भी नहीं बिक रहे थे, इसलिए पैसा जमा नहीं कर पाए थे। बिल्डर ने नोएडा-ग्रेनो प्राधिकरण के खिलाफ कोर्ट के उस आर्डर का पालन कराने की भी मांग की है जिसमें बिल्डर से केवल 8 फीसदी ब्याज लेने का आदेश अदालत ने दिया था।
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क्या है प्लॉट बहाल करने का नियम
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी प्रोजेक्ट को निरस्त कर दिया जाता है तो उसे बहाल कराने के लिए कुल भूआवंटन की दर की फीस जमा करनी होती है। यह पैसा किसी मद में नहीं जुड़ता है। यह पैसा केवल आवंटन को बहाल करने की एवज में लिया जाता है। एक लाख वर्गमीटर के लिए करीब 25 से 30 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर के अनुसार पैसे जमा कराने होते हैं। इसके पीछे भी शर्त है कि कुल राशि का 25 फीसदी तत्काल जमा कराना होता है।
कोर्ट जाने की तैयारी में है बिल्डर
प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि जिस तरह से बिल्डर पत्राचार कर रहा है उससे प्रतीत होता है कि वह जल्द ही कोर्ट जाने की तैयारी में है। इस तरह का पत्राचार करते हुए साक्ष्य जुटाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन प्राधिकरण ने नियमों से उसे बांध दिया है। इससे खरीदारों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।
खरीदारों के लिए प्राधिकरण के दरवाजे खुले: सीईओ
यमुना प्राधिकरण के सीईओ ने कहा कि खरीदारों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। प्राधिकरण के दरवाजे उनके लिए हमेशा खुले हैं। वह जब चाहे आकर मिल सकते हैं और सवालों के जवाब पा सकते हैं।
यह है मामला
सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि अजनारा बिल्डर को 25 एकड़ का प्लॉट आवंटित किया गया था। बिल्डर को 2011 से 2013 तक और 2015 से 2017 तक शून्य काल का लाभ दिया गया। इसके बाद कई बार पैसा जमा कराने के लिए पत्र लिखा गया, लेकिन पैसा समय से जमा नहीं कराया गया। साल-2019 में री-शेड्यूलमेंट पॉलिसी के तहत तीन किस्तों में बिल्डर को पैसा जमा कराने के लिए कहा गया, लेकिन तीन किस्त पूरी नहीं दे पाया। एस्क्रो खाता भी बिल्डर ने नहीं खुलवाया, जबकि री-शेड्यूलमेंट पालिसी की यह शर्त होती है और किस्त टूटने पर प्लॉट निरस्त कर दिया जाता है। इसी के तहत 29 अप्रैल को अजनारा का 25 एकड़ का प्लाट निरस्त कर 11 करोड़ रुपये की राशि को जब्त कर लिया गया था। पेनोरमा प्रोजेक्ट में कुल 3266 फ्लैट बनने थे। इनमें से 695 फ्लैट का आंशिक अधिभोग जारी कर दिया गया था।
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