- 300 टन क्षमता की परियोजना की टेंडर प्रक्रिया निरस्त, 12 अप्रैल से जारी है ग्रामीणों का आंदोलन
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अस्तौली गांव में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कूड़े से बायो-सीएनजी बनाने की अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है। करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 300 टन प्रतिदिन क्षमता के इस प्लांट के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। साथ ही मंगलवार को प्रस्तावित प्री-बिड बैठक भी रद्द कर दी गई। प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक स्वास्थ्य चेतराम सिंह की ओर से जारी कार्यालय आदेश में टेंडर प्रक्रिया को “अपरिहार्य कारणों” से स्थगित करने की बात कही गई है। हालांकि, अधिकारियों ने इस फैसले के पीछे की स्पष्ट वजह बताने से परहेज किया है। 20 अप्रैल को प्राधिकरण ने इस परियोजना के लिए आरएफपी जारी कर कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे और आधुनिक तकनीक को शामिल करने के लिए प्री-बिड बैठक आयोजित की जानी थी, लेकिन अब इसे भी रद्द कर दिया गया है।
दरअसल, अस्तौली में कूड़ा डंपिंग यार्ड के विरोध में स्थानीय लोग 12 अप्रैल से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कूड़े के कारण क्षेत्र में प्रदूषण और बीमारियां बढ़ रही हैं, जिससे उनका जीवन प्रभावित हो रहा है। उनकी मांग है कि डंपिंग यार्ड को पूरी तरह खत्म किया जाए। इस आंदोलन में आसपास के करीब आठ गांवों के लोग शामिल हैं। सोमवार को प्राधिकरण के अधिकारी ग्रामीणों से बातचीत करने के लिए अस्तौली पहुंचे थे, जहां प्रदर्शनकारियों ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। हालांकि वार्ता के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। प्रमुख महाप्रबंधक संदीप चंद्रा ने टेंडर निरस्तीकरण की जानकारी होने से इनकार किया, जबकि आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि लगातार हो रहा विरोध ही इस निर्णय की प्रमुख वजह है। फिलहाल, इस परियोजना का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।