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ग्रेटर नोएडा: कॉलेज की जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश, भूमाफिया के खिलाफ छात्रों का फूटा गुस्सा; पढ़ें पूरा मामला

Wed, 07 Oct 2026 12:23 PM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा

सार

स्कूल प्रिंसिपल महकार सिंह ने बताया कि भूमाफियाओं की नजर काफी समय से कॉलेज की खेल मैदान और परिसर से सटी जमीन पर थी। बुधवार को दबंगों ने भारी संख्या में मजदूरों को बुलाकर करीब 2 हजार गज जमीन पर अवैध रूप से बाउंड्री वॉल का निर्माण शुरू करवा दिया था।
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निर्माणाधीन बाउंड्री वॉल को छात्रों ने गिराया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दनकौर कस्बे में स्थित बिहारीलाल इंटर कॉलेज की करीब 2 हजार गज की जमीन पर भूमाफियाओं द्वारा अवैध कब्जा करने का प्रयास किया गया। हालांकि, कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने एकजुट होकर भूमाफियाओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया, बल्कि निर्माणाधीन बाउंड्री वॉल को भी क्षतिग्रस्त कर आरोपियों को मौके से खदेड़ दिया।

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स्कूल प्रिंसिपल महकार सिंह ने बताया कि भूमाफियाओं की नजर काफी समय से कॉलेज की खेल मैदान और परिसर से सटी जमीन पर थी। बुधवार को दबंगों ने भारी संख्या में मजदूरों को बुलाकर करीब 2 हजार गज जमीन पर अवैध रूप से बाउंड्री वॉल का निर्माण शुरू करवा दिया था। इसकी भनक स्कूल के छात्र-छात्राओं और प्रबंधन को लगी, परिसर में भारी आक्रोश फैल गया। सैकड़ों की संख्या में छात्र और छात्राएं एकजुट होकर मैदान में उतर आए। छात्रों के उग्र रूप को देखकर अवैध निर्माण करा रहे भूमाफिया और उनके साथी पीछे हटने लगे। आक्रोशित छात्रों ने अवैध रूप से खड़ी की जा रही बाउंड्री वॉल को ढहा दिया। छात्रों का भारी विरोध देखकर आरोपी मौके से भाग खड़े हुए।

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि यह जमीन छात्रों के भविष्य और खेलकूद के लिए है, जिस पर किसी भी कीमत पर भूमाफिया का कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को दे दी गई है। स्कूल प्रबंधन ने जिला प्रशासन और पुलिस से आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने और स्कूल की जमीन को पूरी तरह सुरक्षित करने की मांग की है।
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एसीपी रविशंकर मिश्र का कहना है कि दो पक्षों के बीच कॉलेज जमीन का विवाद है। एक पक्ष ने निर्माण शुरू किया था, जिसका कॉलेज के पक्ष ने विरोध किया। इसमें कॉलेज के बच्चे भी आ गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्चों को समझाकर भेज दिया। दोनों पक्षों का विवाद राजस्व में विचाराधीन है। राजस्व से निर्णय होने के बाद ही दोनों पक्षों को निर्माण नहीं करने की हिदायत दी गई है।
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