नगीना। प्रथम विश्व युद्ध में शामिल 109 बहादुर सैनिकों की याद में मांडीखेड़ा गांव में ब्रिटिश हुकूमत द्वारा बनाए गए स्मारक की जमीन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। वर्षों से अतिक्रमण हटाने की जद्दोजहद चली आ रही है। शनिवार को कुछ शरारती तत्वों ने स्मारक तोड़ने के लिए जेसीबी बुलाई। पूर्व चेयरमैन उस्मान दुर्रानी और गालिब मौजी खान फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने अतिक्रमणकारियों को खदेड़ा लेकिन वो बाज नहीं आए इसके बाद पुलिस टीम बुलाई गई। नगीना पुलिस थाने में तस्लीन और भूटटू ने शिकायत दी। शिकायत मिलते ही नगीना थाने की एक टीम मांडीखेड़ा पहुंची और जेसीबी चालक को वहां से भगाया। स्मारक को किसी प्रकार की हानि पहुंचाने पर केस दर्ज करने की चेतावनी पुलिस अधिकारियों ने दी और अब पुलिस मामले में जांच के बाद केस दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
उस्मान दुर्रानी और साबिर हुसैन घागस ने बताया कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मांडीखेड़ा गांव और आसपास के गांवों के 109 जवान शामिल हुए थे। इनकी याद में 1924 में ब्रिटिश हुकूमत ने एक स्मारक नेशनल हाईवे शेरशाह सूरी दिल्ली पर बनवाया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और ब्रिटिश राजकुमारी एलिजाबेथ भी यहां आए थे। लोगों ने मांग की है कि शहीद स्मारक को तोड़ने से रोका जाए और यहां चारदीवारी बनाई जाए। नगीना पुलिस थाने के एसएचओ रमेश चंद ने बताया कि शिकायत मिलने पर पुलिस टीम वहां पहुंची और शरारती तत्वों को स्मारक तोड़ने से रोका गया। साथ ही हिदायत दी गई है कि आगे ऐसा नहीं किया जाए।