20 से 25 हजार में खरीदते थे और 50-55 हजार में बेचते थे पिस्टल
आरोपी अवैध पिस्टल को 50 से 55 हजार व कारतूस को 500 रुपये के हिसाब से बेचते थे। अवैध तमंचा 20 से 30 हजार रुपये में बेचते थे। वह तमंचे को पांच से 15 हजार व पिस्टल 20 से 25 हजार रुपये में खरीदते थे। गिरोह के सदस्य हथियार खरीदने वाले लोगों से गिरोह में शामिल अन्य लोगों के माध्यम से संपर्क करते थे। उन्हें हथियार देने के लिए अपनी जगह पर बुलाते थे।
अवैध हथियार को बेचने से मिले पैसों को मौज-मस्ती और शौक पूरे करने में खर्च करते थे। पुलिस की ओर से आरोपियों को बिना दस्तावेज के कारतूस उपलब्ध कराने वाले संचालक को भी नोटिस जारी किया जाएगा। जांच में पता चला है कि संचालक की ओर से बिना प्रशासनिक रिकॉर्ड में लाए थोक के भाव में अवैध तरीके से 100-200 रुपये में कारतूस उपलब्ध कराए जाते थे।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि बंटू ही पिस्टल और तमंचा सस्ते दाम में उपलब्ध कराता था। बंटू की तलाश की जा रही है। जांच में सामने आया कि गिरोह के कई सदस्य पहले भी गंभीर अपराधों में लिप्त रहे हैं। सरगना गजेंद्र उर्फ गजे के खिलाफ दादरी थाना क्षेत्र में हत्या, आर्म्स एक्ट और धमकी जैसी धाराओं में कई केस दर्ज हैं। वह पहले भी जेल जा चुका है। सुमित उर्फ गुंडा पर कासना थाने में हत्या के प्रयास, हथियार अधिनियम और गुंडा एक्ट के मामले दर्ज हैं। वह एलएलबी का छात्र है। सागर भाटी पर मारपीट, आईटी एक्ट और दुर्घटना से जुड़े केस दर्ज हैं।
मथुरा से लाते थे हथियार
आरोपी मथुरा के जय गुरुदेव मंदिर के पीछे रहने वाले ‘बंटू’ नामक सप्लायर से असलहे खरीदते थे। 32 बोर के कारतूस उन्हें ‘महाकाली आर्म्स एंड एम्यूनिशन’ दुकान (मंडी चौराहा, मथुरा) से उपलब्ध कराए जाते थे। तस्कर कम कीमत पर हथियार खरीदकर दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित अन्य जिलों में अधिक कीमत पर बेचते थे।